तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
जाने दीजिये, क्या कहते कहते, क्या कहने लगा।
मेरी, मेरीही क्यों, यहां जितने हैं सबकी इच्छा है कि आप
“स्मृति कथा” की तरह देशबन्धुके सम्बन्धमें और भी
कुछ लिखिये। आपका भण्डार इतना जल्द रिक्त नहीं
होगा, इसलिये लिखनेका उपादान नहीं मिलेगा, ऐसी
आशंका नहीं है। आप यदि लिखेंगे तो बर्मामें बैठे हुए
कई बंगाली राजबन्दी उसे साग्रह पढ़ेंगे।
संभवतः मैं अधिक समय तक यहां नहीं रहूंगा किन्तु
अब छूटनेकी विशेष इच्छा नहीं है। बाहर होते ही श्म-
शानकी-सी शून्यता मुझे घेर लेगी, इसकी, कल्पना करते
ही हृदय संकुचित हो जाता है। यहांपर सुख, दुख, स्मृति,
स्वप्नमें किसी तरह दिन कट रहे हैं। जेलमें बन्द रहकर
जो ज्वाला अनुभव कर रहा हूं उस ज्वालामें कुछ भी
सुख नहीं है, यह नही कह सकता। जिसको चाहता हूं,
उसको हृदयसे चाहनेके कारण ही मैं आज उस ज्वालाके
भीतर भी शांति पा रहा हूं। जेलकी दीवारसे टकराकर
क्षतविक्षत हृदयको भी जो शान्ति मिल जाती है,
उसे छोड़कर बाहरकी हताशा, शून्यता और दायित्व
लेनेकेलिये मानो मन तैयार नहीं होता।
यहां आये बिना मानो मैं समझ नहीं पाता कि
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