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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 174 में से

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पृष्ठ 142

देशबन्धु
मेरा विश्वास है कि महापुरुषोंका महत्व बड़ी बड़ी
घटनाओंकी बनिस्वत छोटी-छोटी घटनाओंसे विशेष
प्रकट होता है। आषाढ़ और श्रावणकी वसुमतिमें मैंने देश-
बन्धुके सहकर्मियोंके लेख ध्यानसे पढ़े। अनेक लेख चालू-
शब्द तथा पुनरुक्तिसे परिपूर्ण हैं, सिर्फ आपने ही छोटी-
छोटी घटनाओंका विश्लेषण कर देशबन्धुका चरित्र
अंकित करनेकी चेष्टा की है। इसीलिये आपका लेख
पढ़कर कितना सुखी हुआ, कह नहीं सकता। देशबन्धु-
के शिष्य और सहकर्मियोंसे इससे अधिककी आशा
करता था किन्तु अच्छा होता यदि वे कुछ न लिखते।
बीच बीचमें विना यह सोचे नहीं रह सकता कि देशबन्धु-
की अकाल मृत्युकेलिये उनके देशवासी और सहकर्मी
भी जिम्मेदार हैं। यदि वे उनके बोझको कुछ हलका
कर देते तो उन्हें इतना अधिक परिश्रम करके आयु क्षीण
न करना पड़ता। किन्तु हमारा ऐसा अभ्यास हो गया
है कि एक बार जिसको नेता मान लेते हैं, उसके ऊपर
इतना भार लाद देते हैं, उनसे इतनी अधिक आशा
करते हैं कि किसी भी आदमीकेलिये उतना भार वहन
करना और आशापूर्ण करना संभव नहीं होता। राज-
नीति सम्बन्धी सब तरहका दायित्व नेतापर लादकर
हम निश्चिन्त होकर बैठना चाहते हैं।
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