तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
DevanagariHindipublished174 पृष्ठ
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तरुणके स्वप्न
नहीं, तथा एक मर्दके रहते हुए हम किसी महिलाको नहीं
जाने देंगे, यह हमारा कहना था । इस पर काफी देर तक
बहस हुई, किन्तु किसी तरहका निश्चय न हो सका, हम
लोग किसी भी तरह उनकी बात माननेको तैयार नहीं
थे। अन्तमें उन्होंने कहा, “यह मेरी आज्ञा है, पालन
करना होगा।” अपना प्रतिवाद प्रकटकर हमने आज्ञा
शिरोधार्य की।
उनकी बड़ी लड़की विवाहिता थी, उसके ऊपर
उनका कोई जोर या अधिकार नहीं था, उसे वे जेल नहीं
भेज सके। दूसरी कन्या वाग्दत्ता थी, उसे जेल भेजा जाय
या नहीं, इसपर बहस छिड़ी, वे उसे भी भेजना चाहते थे,
कन्या भी जेल जानेकेलिये अत्यन्त उत्सुक थी किन्तु
बाकी सब उसके जेल भेज जानेके विरुद्ध थे, क्योंकि एक
तो उसका शरीर ठीक नहीं था, दूसरे उसका विवाह भी
शीघ्र ही होने वाला था। आखिर उन्हें यह बात
माननी ही पड़ी। बाकी सबका जेल जाना तय ही
था।
बाहरकी घटना तो सब जानते हैं; किन्तु इस घटना-
के मूलमें दुनियाकी नजरोंसे पीछे जो भाव, जो आदर्श,
जो प्रेरणा निहित है, उसका पता किसको है?
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