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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 174 में से

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देशबन्धु
और पद प्रार्थियोंने आकर जब सभा स्थलपर अधिकार
जमा लिया, उस समय हमें, बोलनेका अवसर भी नहीं
मिला। कितने परिश्रमसे, हड्डी तोड़ परिश्रमकर भण्डारमें
धन संचय किया, फिर किस तरह अपना अखबार निकला,
किस तरह जनमतको अपने अनुकूल बनाया, यह बाहरके
आदमियोंको नहीं मालूम। शायद कभी मालूम भी न
होगा। किन्तु इस यज्ञके जो होता, ऋत्विक्, प्रधान पुरो
हित थे वे पूर्णाहूतिके पहलेही कहां, चले गये ? भीतरकी
आग और बाहरकी आग, इन दोनों ज्वालाओंको उनका
पार्थिव शरीर सह न सका।
अनेक सोचते हैं उनके जीवनका उद्देश्य था, स्वदेश
सेवाकेलिये मा के चरणोंमें जीवन उत्सर्ग करना। किन्तु मैं
जानता हूं उनका उद्देश्य इससे भी महान् था। और वे
इसमें बहुत कुछ सफल भी हुए थे। १९२१ की धर
पकड़में उन्होंने निश्चय किया था कि एक एक करके
अपने परिवारके प्रत्येक व्यक्तिको जेल भेज देंगे, फिर
खुद भी चले जायेंगे। अपने लड़केको जेल भेजे बिना वे
दूसरेके लड़केको जेल नहीं भेज सकते थे। हम जानते
थे वे शीघ्रही गिरफ्तार कर लिये जायगें। उनकी गिर-
फतारीके पहले उनके पुत्रके जेल जानेकी कोई आवश्यकता
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