तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेलसे निवेदन
होता। इसीलिये आज मेरे हृदयके अन्तरतम प्रदेशसे निक-
लकर यह वाणी हमेशा मेरे कानोंमें प्रतिध्वनित होती
रहती है, “स्वाधीनता हीनताय के बांचिते चाय रे, के
बांचिते चाय।” मैं हाथ जोड़कर आपसे यह प्रार्थना
करता हूं, आप लोग मुझे आशीर्वाद दें कि स्वराज्य
लाभकी पुण्य प्रचेष्टा ही मेरा जप, तप, स्वाध्याय, साधन
और मुक्तिका सोपान हो तथा जीवनके अन्तिम क्षणतक
मैं भारतीय मुक्ति संग्राममें लगा रहूं।
आत्मोत्सर्गके पवित्र और मूर्तिमान विग्रह प्रातः
स्मरणीय देशबन्धुके चरणोंमें मैंने देश सेवाकी दीक्षा, शिक्षा
ली है। उनके रहते हुए, सब विपत्तियोंको तुच्छ मानकर,
उनकी पताका लेकर चलता रहा हूं। उनकेन रहनेपर उनके
लोकोत्तर चरित्रसे शिक्षा लेकर उसे हृदयमें धारण कर
तथा उनके महिमामय जीवनके आदर्शको सामने रखकर
एकनिष्ट भावसे जीवन पथपर अग्रसर होऊंंगा, यहो
संकल्प मनमें कर रखा है। सर्व मंगलमय भगवान मेरी
रक्षा करें।
इस समय जो निर्वाचन समस्या है, उसका हल आपके
ही ऊपर है। क्योंकि इस निर्वाचन संग्राममें एक प्रवासी
राजवन्दी पहाड़, नदी, समुद्र पार रहकर, इतनी दूरसे
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