तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेलसे निवेदन
सकता। किन्तु आशा करता हूं कि मेरी वर्तमान अवस्था
जानकर आप क्षमा कर देंगे।
जेलमें रहते हुए निर्वाचनकेलिये खड़ा होना चाहिये
या नहीं और निर्वाचनकेलिये खड़े होनेमें कुछ सार्थकता
है या नहीं, इसपर मैने अच्छी तरह विचार किया है।
राष्ट्रीय महासभाने भी इस विषयपर विचार किया है।
देशबन्धु चित्तरंजनदास होते तो वे भी मुझे खड़े होनेके
लिये कहते, ऐसा मेरा विश्वास है। श्री अनिलचरण रॉय
और सत्येन्द्रचन्द्र मित्र महोदयने पुनर्निर्वाचनके समय
जो कुछ कहा था, उससे मेरे कथनका अनुमोदन होता है।
सब बातोंपर अच्छी तरह विचार कर और समझकर कि
निर्वाचनकेलिये उम्मीदवार होनेमें सार्थकता है, मैने
आपके सामने पत्र द्वारा उपस्थित होनेका साहस किया
है। इस निश्चयपर पहुंचनेमे जनमतका अनुकूल होना एक
बहुत बड़ा कारण है, यह कहना ही होगा। अगर सुयोग
होता और सम्भव होता तो मैं स्वयं आपकी सेवामें उप-
स्थित होकर अपने राजनैतिक मतामत व्यक्त करता, तथा
आपका उपदेश और परामर्श जानना चाहता। किन्तु
सरकार द्वारा मैं इस अधिकारसे वञ्चित कर दिया गया
हूं। लगभग दो वर्ष हुए मैं बिना विचार और बिना न्याय
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