सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 127, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 127

तरुणके स्वप्न


कुछ किया है, उसे मैं भूल नहीं सकता। आपने मुझे सेवा
करनेका अधिकार देकर धन्य किया है, मेरी एकान्त
कामना है कि मैं अपने इस अधिकारका समुचित उपयोग
कर सकूं। आपने मेरे प्रति स्नेह और विश्वास प्रकट कर
मुझे सम्मानित किया है।
पूर्ण रूपसे स्वस्थ होनेमें विलम्ब होनेपर भी आपके
आशीर्वाद और शुभ इच्छाके प्रभावसे मैं आरोग्य लाभ
कर रहा हूं। किन्तु शारीरिक आरोग्य प्राप्त करनेपर भी
मानसिक शान्ति पाना असंभव है। बङ्गालकी इतनी सुयोग्य
सन्तानें जबतक बिना अपराध बन्दी हैं, बिना विचारे
जेलोंमें पीसी जा रही हैं, बङ्गालके असंख्य नर-नारी जबतक
अपने प्रिय जनोंके दुःख कष्ट और लांछनाका ख्याल कर
असह्य हार्दिक वेदनासे दिन रात छटपटा रहे हैं, बङ्गालके
असंख्य घर पिता, पुत्र, पति, भाईके बिना श्मसान तुल्य
हो रहें हैं, तबतक कौन बङ्गाली खा-पीकर सुखसे
सो सकता हैं ? बंगालके गवर्नरने मुझे सूचित किया है
कि इस बार कौंसिलमें उपस्थित न होनेपर भी मेरा नाम
सदस्योंकी सूचीसे न काटा जायगा। मेरे मनमें हो रहा
है कि कौंसिलकी आगामी बैठकमैं जब राजबन्दियोंका
प्रश्न उठे तब वहां उपस्थित होकर अपना कर्तव्य पालन

१२६