तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 120, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंजीवन-लक्ष
हैं। ये सब धारणाएं खुद ही अपना पथ बना लेती हैं।
हम तो मिट्टीके पुतले हैं, भगवानकी तेजराशिके कुछ अणु
ही हममें हैं। यही समझकर हमें आत्मोत्सर्ग करना
होगा।
सांसारिक और शारीरिक सुख दुखको अग्राह्य कर
जो इस भावसे आत्मनिवेदन कर सके उसके जीवनमें
सफलता अवश्यम्भावी है। एक दिन मेरे आदर्शकी
विजय होगी, इसका मुझे दृढ़ विश्वास है। इसलिये अपने
स्वास्थ्य और भविष्यके सम्बन्धमें मैं कुछ चिन्ता नहीं
करता।
सरकारी शर्तके जवाबमें मैंने जो कुछ लिखा है उसमें
मैंने अपना मत व्यक्त कर दिया है। किसी किसी सम-
लोचकका कहना है कि अच्छी शर्तें पानेकेलिये मैंने चाल
चली है। समालोचकोंकी इस प्रकारकी निर्दय समा-
लोचनासे मैं दुःखी हूं। मैंने दूकानदारी या दर मुलाई
नहीं की, कूटनीतिसे मुझे घृणा है। मैं एक आदर्श लेकर
खड़ा हूं। बस, यहीं सब शेष है! मैं जीवनको इतना
प्रिय नहीं समझता कि उसकी रक्षाकेलिये चालाकीका
आश्रय लूं। मूल्यके सम्बन्धमें मेरी धारणा बाजारकी
धारणासे पृथक है। शारीरिक या वैषयिक सुखकी
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