तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
लिये उन्हें धन्यवाद है। मेरे साथ अभीतक जो व्यवहार
किया जाता था, उससे यह व्यवहार बिलकुल पृथक है।
२७ अप्रैलको भैयाने मुझे सरकारका उत्तर दिख-
लाया। इस उत्तरसे मूल विषय दोनों पक्षोंके सामने और
भी स्पष्टतासे आगया। ११ अप्रैलको सरकारी शर्तोंका
मैंने जो उत्तर दिया था, अब मैं फिर सोचकर उसे ही
ठीक समझता हूं।
मेरा जो सिद्धान्त है, वह सहज विचारका फल है।
अच्छी तरह सोच-विचार करनेसे यह सिद्धांत और भी
दृढ़ होता है। जीवनको सहज भावसे विचार कर मैं
इस सिद्धान्तपर पहुंचा हूं। अच्छीतरह सोचनेपर यह
सिद्धान्त और अधिक दृढ़ हुआ है। जेलमें मेरे जितने ही
अधिक दिन बीतते हैं, मेरे मनमें यह धारणा दृढ़ होती
है कि, जीवन-संग्रामके मूलमे मतवादका संघर्ष, सत्य या
मिथ्याका संघर्ष रहता है। कोई-कोई इसे सत्यके विभिन्न
पहलुओंका संघर्ष भी कहते हैं। मनुष्यकी धारणा ही
मनुष्यको चलाती है, ये सब धारणाएं निष्क्रिय नहीं हैं,
क्रियाशील और संघर्षात्मक हैं। हेगलका Absolute
Idea, हेपमेन और शोपेनहार Blind Will और हेनरी
“Iean Vital” के मतसे समस्त धारणाएँ ही क्रियाशील
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