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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 174 में से

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जेल-मुक्तिके प्रस्तावका उत्तर


सकती है। इस विषयमें मैं मिस्टर मोवार्लीके साथ सह-
मत हूं। मैं जानता हूं सरकार जितने दिनतक चाहे मुझे
अटका कर रख सकती है। आर्डिनेन्सके खत्म होनेपर
तीसरे रेगुलेशन या किसी अन्य कानूनसे मुझे बन्दी
बना सकती है। व्यवस्थापिकाके सदस्य चाहे जितनी
उछल-कूद मचायें या शासन सभाके सदस्य सफर
खर्च क्यों न ना मंजूर कर दें, मै जानता हूं, सरकार
चाहे तो जीवनभर मुझे बन्दी रख सकती है। सरकार
मुझे चिरकालतक बन्दी रखना चाहती है या नहीं,
यही मैं जानना चाहता हूं। देशबन्धु मुझे युवक-वृद्ध
कहकर पुकारते थे, वे मुझे निराशावादी कहते थे।
हां, मैं निराशावादी हो सकता हूं, क्योंकि ज्यादातर
मैं प्रत्येक घटनाका अशुभ ही देखता हूं। वर्तमान
घटनाका सबसे खराब फल क्या हो सकता है, वह भी
मैंने सोचकर देखा है किन्तु तब भी मैंने निश्चय किया
है, जन्मभूमिसे हमेशाकेलिये दूर होनेकी अपेक्षा जेलमें
मृत्युको वरण करना ही अच्छा है। क्योंकि मैं कविकी
इस वाणीमें विश्वास करता हूं।
“गौरवका पथ सिर्फ मृत्युकी ओर ले जाता है।”
सरकारके प्रस्तावके पक्ष और विपक्षमें जो कुछ

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