तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
DevanagariHindipublished174 पृष्ठ
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तरुणके स्वप्न
कहना है, मैंने वह सब कहा है। मेरे छुटकारेकी संभावना
दूर चली गयी इसके लिये कोई दुख न करे। पिता माता-
को सबसे अधिक कष्ट होगा, उनको सान्तवना दीजि-
येगा। स्वतंत्रताके पहले व्यक्तिगत और सामूहिक
भावसे हमें अनेक कष्ट सहने होंगे। भगवानको धन्य-
वाद है कि मैं निर्विकार हूं और हर तरहकी अग्निपरीक्षा-
के लिये प्रस्तुत हूं। अपनी जातिके समस्त पापोंका मैं
प्रायश्चित्त कर रहा हूं, इसीसे मैं तृप्त हूं। हमारा विचार
और आदर्श अमर रहेगा, हमारी स्मृति कभी भी नष्ट
न होगी, भविष्य सन्तान हमारी प्रिय कल्पनाकी उत्तरा-
धिकारिणी होगी, यही विश्वास कर हर तरहकी विपत्तियों
और कष्टोंको सहास्य सहकर जीवन बिता दूंगा। इति
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