तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
DevanagariHindipublished174 पृष्ठ
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तरुणके स्वप्न
मेरी गिरफ्तारीके बाद बंगाल सरकारने मेरे आश्रितोंके
लिये तथा घरकी रक्षाकेलिये किसी तरहका भत्ता नहीं
दिया। इसकेलिये मैंने बड़े लाटके पास आवेदन भेजा
था पर बंगाल सरकारने उसे दबाकर रख छोड़ा। इसके
बाद अब फिर मुझे तीन साल विदेशमें रहनेकेलिये कहा
जा रहा है। युरोप रहनेके समय मुझे अपना खर्च स्वयं
चलाना होगा। यह प्रस्ताव कैसे युक्ति संगत है यह
समझमें नहीं आता। १६२४ में मेरा स्वास्थ्य जितना अच्छा
था, कमसे कम वैसाही स्वास्थ्यशाली बनाकर सरकारको
मुझे छोड़ना चाहिये। जेलमें रहनेके कारण मेरे स्वा-
स्थ्यकी हानि हुई तो क्या सरकार उसकी क्षति पूर्ति
नहीं करेगी ? युरोपमें जब तक मैं स्वस्थ न हो जाऊं
तब तक सरकारको मेरा सब खर्च देना चाहिये। सरकार
यदि युरोप जानेके पहले मुझे घर जाने देती, युरोपमें
मेरा सब खर्च देती और स्वस्थ होतेही मुझे भारत
लौटने देती तो मैं उसके व्यवहारको सहृदयता-पूर्ण
समझता।
मिस्टर मोवार्लीने कहा है सरकार और सुभाषचन्द्र
बोस; दोनो ही समझते हैं कि आर्डिनेन्सकी अवधि
समाप्त होने तक सरकार सुभाषचन्द्र बोसको अटकाकर रख
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