तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल-मुक्तिके प्रस्तावका उत्तर
'पहली बात सच है तो ब्यूरोक्रेसीके मुकाबलेमें मैं भयका
कारण बनूं यह मेरे लिये श्लाघाकी बात है। किन्तु इसके
बाद ही जब मैं अपने जीवन और कार्य-कलापके बारेमें
सोचता हूं तो अनुभव करता हूं एक हिंसा परायन दल मुझे
जैसा समझता है, वैसा मैं नहीं हूं। मैंने बंगालके बाहर कोई
राजनैतिक कार्य नहीं किया और भविष्यमें करूंगा ऐसा
भी मनमें नहीं सोचता, क्योंकि मैं बंगालको ही अपना
कार्य-क्षेत्र और अपने आदर्शकेलिये काफी विस्तृत सम-
झता हूं। बंगाल सरकारके सिवा अन्य किसी सरकारके
पास मेरे विरुद्ध कोई अभियोग है, ऐसा मैं नहीं समझता।
तब क्यों मेरे लिये समस्त भारत, सिंहल, और बर्मामें
प्रवेश करना निषेध बताया गया ? सिंहल तो बिलकुल
ब्रिटिश उपनिवेश है, कानूनन भारत सरकारकी आज्ञा
वहां चल सकती है, यह सन्देह जनक है।
बंगाल सरकार इस समय मेरी गति विधि नियन्त्रित
करना चाहती है। किन्तु जब मैं स्वाधीन था, तभी
मेरी गति विधि क्या थी ? अक्टूबर सन् १६२३ से
अक्टूबर १६२४ तक सिर्फ दो बार मैं कलकत्ते से बाहर
गया हूं। एक बार खुलना जिला कांफ्रेंसमें, दूसरी बार
नदिया जिलेके कौंसिल निर्वाचनमें खड़े हुए एक उम्मी-
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