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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 111, कुल 174 में से

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तरुणके स्वप्न
सम्बन्धमें सच बात बतलाने या मेरे कुछ बोलनेकी जगह
नहीं रहेगी। इस प्रकार सम्भवतः १६२६ के पहलेही वे
मुझे बड़ा भारी बोलसेविक नेता प्रकट कर देंगे, जिसके
कारण भारत लौटनेका मेरा रास्ता हमेशाकेलिये
लिये बन्द हो जायगा, क्योंकि युरोपवाले सिर्फ बोल-
सेविकसे ही डरते हैं। इसलिये मैं अपनी इच्छासे अपनी
जन्मभूमिसे निर्वासित होना नहीं चाहता। सरकार भी
यदि मेरे दृष्टि कोणसे इसपर विचार करे तो मेरी अवस्था
समझ सकती है।
यदि बोलसेविक एजेन्ट होनेकी मेरी इच्छा होती तो
सरकारके कहते ही, सबसे पहले मिलनेवाले जहाजसे मैं
युरोपकेलिये रवाना हो जाता। तथा स्वास्थ्य ठीक
होनेपर बोलसेविक दलमें मिलकर समस्त संसारमें एक
विराट् विद्रोहकी सृष्टिकेलिये पेरिससे लेनिन ग्राड तक
दौड़ धूप करता। किन्तु मेरी ऐसी इच्छा या आकांक्षा
नहीं है। जब मैंने सुना कि मुझे भारत, सिंहल और वर्मा
लौटकर नहीं आने दिया जायगा, तब मैने सोचा कि क्या
सचमुच मैं भारतमें ब्रिटिश शासनकी रक्षाकेलिये इतना
विपज्जनक हूं। बंगालसे निर्वासित करके भी सरकार
सन्तुष्ट नहीं हुई, अथवा सब कुछ धोखेबाजी है ? यदि
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