तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 113, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
दवारका समर्थन करनेकेलिये । १६२४ के फरवरी माससे
अक्टुबर तक मैं एक बार भी बाहर नहीं गया । सिराज-
गंज कांफ्रेंसके साथ मुझे नत्थी करनेकेलिये काफी
कोशिश की गयी, इस समय मैं कारपोरेशनके चीफ इक-
जीक्युटिव आफिसरकी हैसियतसे कारपोरेशनके काममें
विशेष व्यस्त था,ठीक कांफ्रेंसके समय कारपोरेशनके धां-
गड़ोकी हड़तालकी संभावनाके कारण एक मिनटकेलिये भी
बाहर जाना संभव नहीं था । सन् १६२४ के मेसे अक्टुबर
तक मैने जो कुछ किया उसे सब जानते हैं । उस समय
सरकारको मेरी गति विधिका सब हाल मालूम था । मेरी
गतिविधिको नियंत्रित करना ही यदि मेरे गिरफ्तार किये
जानेका कारण है तो मैं कह सकता हूं कि मुझे गिरफ्तार
करनेकी कोई जरूरत नहीं थी ।
मिस्टर मोवार्लीने एक विषयमें हृदय हीनताका परि-
चय दिया है। सरकार जानती है प्राय २।। वर्षसे मैं निर्वा-
सित हूं, इस समयमें मैं अपने किसी आत्मीय, यहां तक
कि पिता मातासे भी नहीं मिल सका । सरकारने प्रस्ताव
किया है कि मुझे २।।-३ वर्ष विदेशमें रहना पड़ेगा, इस
समय भी उनके साथ मिलनेकी कोई सुविधा नहीं
मिलेगी । यह मेरे लिये कष्ट दायक है इसमें सन्देह नहीं,.
११२