तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
सिया, असीरिया, बोबिलोनिया, मिस्र, ग्रीस, रोम, टर्की,
इंग्लैण्ड, रूस, जर्मनी, चीन, जापान, हिन्दुस्तान—चाहे
जिस देशका इतिहास पढ़कर देखो, देखोगे कि हर देशके
इतिहासके प्रत्येक पृष्ठपर हमारी कीर्ति ज्वलन्त अक्षरोंमें
लिखी हुई है। हमारी सहायतासे सम्राट् सिंहासनपर
बैठे और हमारे संकेतसे सभय सिंहासन छोड़कर भाग
खड़े हुए। जिस तरह हमने एक तरफ प्रेमके आंसुओंसे
ताजमहल निर्माण किया है, उसी तरह दूसरी तरफ अपने
हृदयके रक्तसे पृथ्वीको रंजित किया है। हमारी संयुक्त
शक्ति लेकर समाज, राष्ट्र, साहित्य, कला, विज्ञान, युग-
युगमें, देश देशमें उन्नत हुआ है। फिर हमने जब कराल
मूर्ति धारण कर ताण्डवनृत्य आरंभ किया है, उसके एक-
एक पद विक्षेपसे कितने समाज, कितने साम्राज्य, धूलमें
मिल गये हैं।
इतने दिन बाद हमने अपनी शक्ति पहचानी है, अपना
धर्म जाना है। अब कौन हमारा शासन कर सकता है?
कौन हमारा शोषण कर सकता है? नव जागरणके युगमें
सबसे बड़ी बात, सबसे बड़ी आशा, तरुणोंका आत्म-
प्रतिष्ठा-लाभ है। इसीसे तो जीवनके हर क्षेत्रमें यौवन-
का रक्तिम आभास दिखलायी पड़ेगा। यह तरुणोंका
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