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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 174 में से

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पृष्ठ 107

तरुणके स्वप्न

ममें जाकर रोग मुक्त हुए हैं, यह देखकर उन्होंने मेरे लिये
भी वही सिफारिश की जो अन्यान्य यक्ष्मा रोगियोंके
लिये की थी। जो धनवान रोगी स्विटजर लैण्डके रहनेका
और दवा-पानीका खर्च सहन कर सकते हैं उनके लिये
यह सुझाव सर्व श्रेष्ठ है। किन्तु यह स्पष्ट है कि इस
तरहके किसी प्रस्तावसे मैं अपनेको किसी तरहसे बाध्य
नहीं समझ सकता।
सरकारने भाई साहबके रोग विवरणको स्वीकार
नहीं किया किन्तु स्वास्थ्य प्राप्तिके लिये उनके
प्रस्तावको स्वीकार कर लिया, क्योंकि मिस्टर मोबार्ली-
ने कहा है कि; “सुभाषचन्द्र बोस अधिक पीड़ित नहीं
हुए और काम करनेसे बिलकुल ही लाचार नहीं हुए यह
सभी जानते हैं।” मैं यह जानना चाहता हूं कि सरकार
मुझे कब “अत्यधिक पीड़ित” और “काम करनेसे बिल-
कुल लाचार” समझेगी ? जिस दिन सब चिकित्सक
कहेंगे कि मैं रोगसे छुटकारा नहीं पा सकता और कुछ
महिनोंमें ही मेरी मृत्यु हो जा सकती है, तब क्या ?
इसके सिवा वे यदि भैयाका दिया हुआ रोग विव-
रण स्वीकार नहीं करते तो फिर जिससे उसका बाहरी
अनुमोदन होता है उसे ग्रहण करनेको इतने व्यस्त क्यों

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