तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 105, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंकि वे मेरे अतीत कार्य-कलाप और भविष्यकी गतिविधि-
के लिये किसी तरहकी स्वीकारोक्ति नहीं चाहते। उन्होंने
कहा है कि मैं यदि प्रतिज्ञा करके कहूं तो वे मुझे छोड़
देंगे। अन्तमें उन्होंने कहा है कि पहले उन्होंने यह प्रस्ताव
मेरे सामने इसलिये नहीं रखा, कि ऐसा होनेसे मनमें यह
बात मेरे मनमें आ सकती थी कि प्रस्ताव स्वीकृत
करनेकेलिये मुझे बाध्य किया जा रहा है। इन अंशोको
पढ़कर समझा हूं कि वे मुझे आत्म-सम्मान विशिष्ट
सज्जन पुरुष समझते हैं और निम्नलिखित कारणोंके
कारण उनके प्रस्तावमें मेरे प्रति जो सम्मानजनक अंश
है उसकी उपलब्धि मैंने की है। अन्तमें बङ्गीय कानून
सभाके सदस्यकी हैसियतसे माननीय सभ्यके इस
तरहके व्यवहारकी प्रशंसा किये बिना भी मुझसे
नहीं रहा जाता। क्योंकि मेरा ख्याल है कि कौंसिल
के सभ्योंके प्रति आस्था स्थापनेकर किसी प्रस्तावका
सर्वप्रथम उनके सामने उपस्थित करनेका निदर्शन यह सर्व-
प्रथम ही है।
मेरा ख्याल है कि मिस्टर मोवार्लोको प्रस्तावके
सम्बन्धमें अपनी तरफसे कुछ नहीं कहना है।
सबसे पहले एक