तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)
Tarkasangraha with Nyayabodhini of Annambhatta by Kedarnath Tripathi
अन्नम्भट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६० तर्कसंग्रहः [ अनुमानपरिच्छेदः
यस्य साध्याभावः प्रमाणान्तरेण निश्चितः, स बाधितः । यथा-
वह्निरनुष्णो द्रव्यत्वादिति । अत्रानुष्णत्वं साध्यं, तदभाव उष्णत्वं
स्पर्शनप्रत्यक्षेण गृह्यत इति बाधितत्वम् ।
जिस हेतु के साध्य का अभाव प्रत्यक्षादि प्रमाणान्तर से पक्ष में निश्चित हो,
वह हेतु बाधितनामक हेत्वाभास है । जैसे— "वह्निरनुष्णो द्रव्यत्वात्" इस अनुमान
में द्रव्यत्व-हेतु बाधित है । क्योंकि यहाँ अग्नि में अनुष्णत्व (उष्णत्वाभाव) साध्य
है, और उष्णत्वाभाव का अभाव उष्णत्व स्पर्शनप्रत्यक्ष से सभी को अग्नि में गृहीत
होता है । इसलिये यहाँ का द्रव्यत्व-हेतु बाधितनामक हेत्वाभास होगा ।
॥ इत्यनुमानपरिच्छेदः ॥
न्यायबोधिनी
फलम् । तथाच धूमाभाववद्वृत्तित्वाभावरूपधूमव्यभिचारे गृहीते वह्नौ
धूमाभाववद्वृत्तित्वरूपव्याप्तिज्ञानप्रतिबन्धः फलम् ।
न च व्याप्यत्वासिद्धेः व्यभिचारादभेद इति वाच्यम्, धूमाभाववद्वृत्ति-
त्वाभावाभावत्वेन व्याप्यत्वासिद्धत्वं, धूमाभाववद्वृत्तित्वेन व्यभिचारित्व-
मिति भेदात् ।
यस्येति । यस्य हेतोः साध्याभावः—साध्यबाधः, प्रमाणान्तरेण—प्रत्य-
क्षादिप्रमाणेन पक्षे निश्चितः, स बाधित इत्यर्थः । तथा च प्रात्यक्षिकसाध्य-
बाधनिश्चये जाते साध्यानुमितिप्रतिबन्धः फलम् । बाधितसाध्यकत्वाद्
बाधितहेतुरित्युच्यते ।
॥ इति न्यायबोधिन्यामनुमानपरिच्छेदः ॥
हिन्दी-कला
वृत्तित्वाभावरूप धूम-व्यभिचार का ग्रहण होने पर धूमाभाववद्वृत्तित्वरूप व्याप्ति के
ज्ञान का प्रतिबन्ध हो जाना व्याप्यत्वासिद्धि-हेत्वाभास का फल है ।
यहाँ यह आपत्ति नहीं दी जा सकती कि "व्याप्यत्वासिद्धि का व्यभिचार के साथ
अभेद हो गया" क्योंकि धूमाभाववद्वृत्तित्वाभावाभावत्व रूप से व्याप्यत्वासिद्धि होती
है । यही दोनों में भेद है ।
जिस हेतु का साध्याभाव अर्थात् साध्य का बाध प्रत्यक्षादि-प्रमाण से पक्ष में पहले
से ही निश्चित है, वह हेतु बाधित कहाता है । अतः प्रत्यक्ष-प्रमाण से साध्य के बाध
का निश्चय होने पर साध्या नुमिति का प्रतिबन्ध हो जाता है । यही बाधज्ञान का
फल है । यद्यपि साध्य ही बाधित होता है, फिर भी उपचार से हेतु को बाधित कहा
जाता है ।
इति तर्कसंग्रहन्यायबोधिन्याः 'हिन्दी-कलायाम्' अनुमानपरिच्छेदः ।