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सर्वकोश
तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)

तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)

Tarkasangraha with Nyayabodhini of Annambhatta by Kedarnath Tripathi

अन्नम्भट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 199 में से

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पृष्ठ 80

अथोपमानपरिच्छेदः
उपमितिकरणमुपमानम् । संज्ञासंज्ञिसम्बन्धज्ञानमुपमितिः,
तत्करणं सादृश्यज्ञानम् । तथाहि—कश्चिद् गवयपदार्थमजानन्
कुतश्चिदारण्यकपुरुषात् 'गोसदृशो गवय' इति श्रुत्वा वनं गतो
वाक्यार्थं स्मरन् गोसदृशं पिण्डं पश्यति । तदनन्तरमसौ गवयशब्द-
वाच्य इत्युपमितिरुत्पद्यते ।
उपमितिनामक प्रमा का करण उपमान प्रमाण है । संज्ञा-संज्ञि के सम्बन्ध का
ज्ञान उपमिति है । उसका करण ( असाधारण कारण ) सादृश्यज्ञान है । जैसे -- कोई
व्यक्ति गवयपदार्थ को नहीं जानता हुआ किसी वनवासी व्यक्ति से यह सुनकर कि—
गो के सदृश गवय होता है--वन में गया और वहाँ गोसदृश गवय होता है, इस
वाक्यार्थ का स्मरण करता हुआ गोसदृश पिण्ड को देखता है । उसके बाद वह
दृश्यमान जानवर 'गवयशब्दवाच्य है' ऐसी उपमिति उत्पन्न हो जाती है ।
॥ इत्युपमानपरिच्छेदः ॥
न्यायबोधिनी
उपमानं लक्षयति—उपमितिकरणमिति । उपमिति लक्षयति—संज्ञा-
संज्ञीति । संज्ञा नाम पदम्, संज्ञी अर्थः, तयोः सम्बन्धः शक्तिः । तथा च पद-
पदार्थसम्बन्धज्ञानमुपमितिरित्यर्थः । उपमानं नामातिदेशवाक्यार्थज्ञानम् ।
अतिदेशवाक्यार्थस्मरणं व्यापारः । उपमितिः फलम् । गोसदृशो गवयपद-
वाच्य इत्याकारकवाक्याद् गोसादृश्यावच्छिन्नविशेष्यकगवयपदवाच्यत्वप्रका-
रेण यज्ज्ञानं जायते, तदेव करणम् ।
॥ इति न्यायबोधिन्यामुपमानपरिच्छेदः ॥
हिन्दी-कला
उपमिति के करण को उपमान-प्रमाण कहते हैं । संज्ञा और संज्ञी के सम्बन्ध का
ज्ञान ही उपमिति है । संज्ञा = पद और संज्ञी = अर्थ कहाता है । इन दोनों का अर्थात्
पद और उसके अर्थ का सम्बन्ध शक्ति है । इस प्रकार पद-पदार्थ के सम्बन्ध ( शक्ति )
का ज्ञान उपमिति है । "गोसदृशो गवयपदवाच्यः" इस अतिदेशवाक्य के अर्थ का
ज्ञान उपमान है । उक्त अतिदेशवाक्यार्थ का ज्ञान होने के अनन्तर उक्त वाक्यार्थ का
स्मरण व्यापार है और गवयपदवाच्यत्व ( शक्ति ) ज्ञानरूप उपमिति इस प्रमाण का
फल है । इस प्रकार "गोसदृशो गवयपदवाच्यः" इत्याकारक अतिदेशवाक्य से गोसा-
दृश्यावच्छिन्नविशेष्यक गवयपदवाच्यत्वप्रकारक जो ज्ञान पैदा होता है, वही उपमिति-
प्रमा का करण है ।
इति तर्कसंग्रहन्यायबोधिन्याः 'हिन्दी-कलायाम्' उपमानपरिच्छेदः ।