तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ तर्कभाषा [ निर्गुणोत्पत्तिः
तदा कारणभेदोऽप्यस्ति । घटो हि घटं प्रति न कारणमेकस्यैव
पौर्वापर्याभावात् । न हि स एव तमेव प्रति पूर्वभावी पश्चाद्भावी चेति ।
स्वगुणान् प्रति तु पूर्वभावित्वाद् भवति गुणानां समवायिकारणम् ।
नन्वेवं सति प्रथमे क्षणे घटोऽचाक्षुषः स्याद्, अरूपिद्रव्यत्वाद्
वायुवत् । तदेव हि द्रव्यं चाक्षुषं, यन्महत्त्वे सत्युद्भूतरूपवत् ।
तब [ प्रथम क्षण में निर्गुणघट की उत्पत्ति होती है और उसके बाद उस
घट में रूपादि गुण उत्पन्न होते हैं ऐसा मानने पर गुण और गुणी अर्थात् घट
और रूपादि में ] कारण भेद भी [ हो सकता ] है । घट घट के प्रति [ अर्थात्
स्वयं अपने प्रति ] कारण नहीं होता है एक [ उसी घट ] में ही पौर्वापर्य का
अभाव होने से वही [ घट ] उसी [ स्वयं अपने ] के प्रति पूर्व भावी [ कारण ]
और पश्चाद्भावी [ कार्य ] नहीं हो सकता है । अपने [ अर्थात् घट गत रूपादि ]
गुणों के प्रति तो पूर्वभावी होने से गुणों का समवायि कारण हो सकता है ।
[ इस लिए प्रथम क्षण में निर्गुण घट की उत्पत्ति होने के बाद अगले क्षण में
उसमें रूपादि गुण उत्पन्न होते हैं यही सिद्धान्त मानना उचित है । और इस
दशा में घटादि गुणी स्वगत रूपादि गुणों के समवायि कारण हो सकते हैं । ]
इस पर पूर्वपक्षी फिर शंका करता है कि यदि प्रथम क्षण में निर्गुण घट
उत्पन्न होता है इस सिद्धान्त को माना जाय तो उस में दो दोष आ जावेंगे ।
पहिला दोष तो यह होगा कि उस प्रथम क्षणमें घट का चाक्षुष प्रत्यक्ष नहीं हो
सकेगा । क्योंकि चाक्षुष प्रत्यक्ष उसी द्रव्य का हो सकता है जिसमें महत्
परिमाण और उद्भूत रूप ये दो गुण रहते है । प्रथम क्षण का घट क्योंकि
निर्गुण उत्पन्न होता है इस लिए उसमें रूपादि गुण रहते ही नहीं इसलिए रूप
रहित होने से घट का चाक्षुष प्रत्यक्ष नहीं हो सकेगा । जैसे वायु रूप रहित
द्रव्य है उसका चाक्षुष प्रत्यक्ष नहीं होता । इसी प्रकार प्रथम क्षण का निर्गुण
घट भी रूप रहित है अतः उसका चाक्षुष प्रत्यक्ष नहीं हो सकेगा । यह पहिला
दोष निर्गुण उत्पत्ति पक्ष में आता है ।
दूसरा दोष यह होगा कि प्रथम क्षण के घट को द्रव्य नहीं कहा जा सकेगा
क्योंकि 'गुणाश्रयो द्रव्यम्' जो गुण का आश्रय हो, जिसमें गुण रहते हों उसी
को द्रव्य कहते हैं यह द्रव्य का लक्षण है । प्रथम क्षण का घट गुणाश्रय नहीं है
निर्गुण होने से उसमें गुण नहीं रहते इसलिए उसमें द्रव्य का लक्षण न घट
सकने से उसको द्रव्य भी नहीं कहा जा सकता है । इसलिए प्रथम क्षण में निर्गुण
घट उत्पन्न होता है यह नहीं मानना चाहिये । यही पूर्वपक्ष प्रस्तुत करते हैं ।
[ प्रश्न ] अच्छा तो ऐसा [ निर्गुणोत्पत्ति ] होने पर प्रथम क्षण में घट