तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिर्गुणोत्पत्तिः ] प्रमाणनिरूपणम् ३३
ननु यदैव घटादयो जायन्ते तदैव तद्गतरूपादयोऽपि, अतः समान-
कालीनत्वाद् गुणगुणिनोः सव्येतरविषाणवत्कार्यकारणभाव एव नास्ति
पौर्वापर्याभावात् । अतो न समावायिकारणं घटादयः स्वगतरूपादीनाम् ।
कारणविशेषत्वात् समवायिकारणस्य ।
अत्रोच्यते । न गुणगुणिनोः समानकालीनं जन्म, किन्तु द्रव्यं निर्गु-
णमेव प्रथममुत्पद्यते पश्चात् तत्समवेता गुणा उत्पद्यन्ते । समानकालो-
त्पत्तौ तु गुणगुणिनोः समानसामग्रीकत्वादभेदो न स्यात् । कारणभेद-
नियतत्वात्कार्यभेदस्य । तस्मात्प्रथमे क्षणे निर्गुण एव घट उत्पद्यते
गुणेभ्यः पूर्वभावीति भवति गुणानां समवायिकारणम् ।
पूर्वपक्ष उठा कर प्रथम क्षण में निर्गुण घट उत्पन्न होता है और अगले क्षण में
उसमें रूपादि गुण उत्पन्न होते हैं । इस प्रकार गुणी और गुणों की उत्पत्ति में
पौर्वापर्य बन जाता है और गुणी गुण का समवायि कारण होता है इस सिद्धांत-
पक्ष को स्थिर करने के लिए यह दूसरा उदाहरण दिया गया है । पंक्तियों का
अर्थ इस प्रकार है :-
[ प्रश्न ] जब ही घटादि [ गुणी ] उत्पन्न होते हैं । तब ही उनमें रहने वाले
रूपादि [गुण] भी उत्पन्न होते हैं । इसलिए गुण और गुणी के समानकालीन होने
से [ समान काल में उत्पन्न होने वाले ] बायें और दाहिने सींगों के समान उनमें
कार्य कारण भाव ही पौर्वापर्य के अभाव के कारण नहीं हो सकता है । अतएव
घट आदि [ गुणी ] स्वगत रूपादि [ गुणों ] के समवायि कारण नहीं हो सकते ।
[ यह पूर्वपक्ष हुआ ] ।
इसका समाधान करते हैं । गुण और गुणी का समानकालीन जन्म नहीं होता
किन्तु पहिले निर्गुण द्रव्य ही उत्पन्न होता है और उसके बाद उसमें समवाय
सम्बन्ध से रहने वाले गुण उत्पन्न होते हैं। गुण और गुणी की समानकालीन
[ एक साथ ही ] उत्पत्ति [ मानने ] में तो उनकी कारण सामग्री के [ भी ]
समान होने से गुण और गुणी का भेद भी नहीं बनेगा । क्योंकि कार्य का भेद
कारण के भेद के साथ नियत है । [ अर्थात् कार्य में भेद तभी हो सकता है जब
उनके कारण भिन्न हों । गुण और गुणी का समानकालीन जन्म होने पर उनकी
कारण सामग्री भी समान ही होगी उस दशा में रूपादि को गुण और घटादि को
गुणी कहा जाय यह भेद भी नहीं बनेगा । इस लिए गुण और गुणी का समान-
कालीन जन्म मानना उचित नहीं है ] इस लिए प्रथम क्षण में निर्गुण घट ही
उत्पन्न होता है और गुणों से पूर्वभावी होता है इसलिए [ स्वगत रूपादि ] गुणों
का समवायि कारण हो सकता है ।
३ त० भा०