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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 69, कुल 330 में से

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पृष्ठ 69

४ तर्कभाषा [ पाश्चात्त्यतर्कार्थाः
लिए कारणों के ऊहापोहात्मक तर्क से विशेष रूप से सम्बद्ध होने के कारण
यह न्यायशास्त्र अनेक स्थलों में तर्क अथवा तर्कशास्त्र नाम से व्यवहृत हुआ है
वह उचित ही है। इसीलिए उस न्यायशास्त्र के सिद्धान्तों का परिचय देने
वाले इस ग्रंथ का 'तर्कभाषा' नाम रखा गया है वह अन्वर्थ और उचित ही है।
पाश्चात्त्यतर्क—
पाश्चात्त्य दर्शनों में न्यायशास्त्र अथवा तर्कशास्त्र के लिए 'लाजिक' शब्द
का प्रयोग होता है। यह लाजिक शब्द यूनानी भाषा की मूल 'लोगस' धातु
से बना है। इस लोगस धातु का अर्थ विचार तथा वाणी दोनों हैं। इसलिए
विचार तथा वाणी से सम्बन्ध रखने वाली अर्थात् वाणी द्वारा विचारों को
अभिव्यक्त करने की शैली तथा नियमों का निर्धारण करने वाली विद्या का
नाम लाजिक अथवा तर्कशास्त्र है। हमारे यहाँ न्याय शास्त्र के आदि प्रवर्तक
महर्षि 'अक्षपाद गौतम' माने जाते हैं। इसी प्रकार पश्चिमी तर्कशास्त्र के प्रवर्तक
यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक 'अरस्तू' माने जाते हैं। ये अरस्तू महोदय सुप्रसिद्ध
यूनानी सम्राट् सिकन्दर, जिसने ईसा से ३२७ वर्ष पूर्व भारत पर आक्रमण
किया था, के गुरु थे। उनके तर्कशास्त्र में और अपने न्यायशास्त्र में अनेक
भेद होते हुए कुछ समानताएं भी पाई जाती हैं। जैसे वैशेषिक दर्शन के द्रव्य,
गुण, कर्म आदि सात पदार्थों के स्थान पर अरस्तू ने १ द्रव्य [ सब्स्टैन्स ],
२ गुण [ क्वालिटी ], ३ कर्म [ एक्शन ], ४ समवाय [ रिलेशन ], ५ परिमाण
[ क्वान्टिटी ], ६ काल [ टाइम ], ७ देश [ स्पेस ], ८ क्रियाभाव या नैष्कर्म्य
[ पैशन ], ९ अधिकारसम्बन्ध [ पजैश्रन ] और १० स्थिति [ सिचुएशन ]
रूप दस पदार्थों को माना है, जिन्हें कैटागरीज़ [ Categories ] कहते हैं ।
मीमांसकों के समान उन्होंने अनुमान के प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण अथवा
उदाहरण, उपनय और निगमन ये तीन ही अवयव माने हैं ।
नवीन तथा प्राचीन शैली का भेद—
न्याय, वेदान्त, व्याकरण आदि शास्त्रों में नव्य तथा प्राचीन नाम से दो
प्रकार का साहित्य पाया जाता है। नव्य न्याय और प्राचीन न्याय, नव्य,


  1. Substance, 2. Quality, 3. Action, 4. Relation,
  2. Quantity, 6. Time, 7. Space, 8. Passion, 9. Possession,
  3. Situation.