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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 330 में से

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पृष्ठ 62

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उन्होंने अपने गुरु श्री केशवमिश्र का परिचय देने का प्रयत्न किया है। वह
श्लोक निम्न प्रकार है—
श्रीविश्वनाथानुज-पद्मनाभानुजो गरीयान् बलभद्रजन्मा ।
तनोति तर्कानधिगत्य सर्वान् श्रीपद्मनाभाद्विदुषो विनोदम् ॥
'गोवर्धन मिश्र' ने इस श्लोक में 'केशवमिश्र' का जो परिचय दिया है
उसके अनुसार उनके पिता का नाम 'बलभद्र' था। उनके दो बड़े भाई क्रमशः
'विश्वनाथ' तथा 'पद्मनाभ' नाम के थे। 'केशवमिश्र' ने अपने बड़े भाई
'पद्मनाभ' से तर्कशास्त्र का अध्ययन कर के 'स्वान्तःसुखाय' इस 'तर्कभाषा'
की रचना की है।
केशवमिश्र के बड़े भाई 'पद्मनाभमिश्र' स्वयं एक बड़े अच्छे नैयायिक
विद्वान् थे। उन्होंने वैशेषिक दर्शन के 'प्रशस्तपाद भाष्य' पर श्री उदयनाचार्य
विरचित 'किरणावली' नामक टीका पर 'किरणावलीप्रकाश' नामक व्याख्या
ग्रन्थ, तथा 'कणादरहस्यमुक्ताहार' नामक एक अन्य ग्रन्थ की रचना की है।
'किरणावली' पर नव्यन्याय के प्रवर्तक 'गंगेशोपाध्याय' के शिष्य 'श्री
वर्धमानोपाध्याय' [ १२५० ई० ] ने भी 'किरणावली-प्रकाश' नाम से ही एक
टीका लिखी है। परन्तु 'पद्मनाभ मिश्र' अपने 'किरणावली-प्रकाश' में 'वर्धमान'
के 'किरणावली-प्रकाश' की अपेक्षा कुछ विशेषता बतलाते हैं। उन्होंने लिखा
है कि 'वर्धमान' ने जिन अर्थों का स्पर्श भी नहीं किया है इस प्रकार के बिल्कुल
नवीन और अपने गुरु द्वारा उपदिष्ट अर्थों का हम अपने इस 'किरणावली-
प्रकाश' में वर्णन कर रहे हैं। उनका श्लोक इस प्रकार है—
उपदिष्टा गुरुचरणैरस्पृष्टा वर्धमानेन ।
किरणावल्यामर्थास्तन्यन्ते पद्मनाभेन ॥
अर्थात् अपने गुरु जी द्वारा बतलाये गए ऐसे अर्थों का जिनको कि 'किरणा-
वली-प्रकाश' नामक टीका के लेखक 'वर्धमानोपाध्याय' ने अपने ग्रन्थ में छुआ भी
नहीं है उनको हम अर्थात् इस नवीन 'किरणावली-प्रकाश' के लेखक 'पद्मनाभ
मिश्र' अपने इस ग्रन्थ में लिख रहे हैं।
इस श्लोक से प्रतीत होता है कि 'पद्मनाभमिश्र' जो कि केशवमिश्र के बड़े
भाई हैं वर्धमानोपाध्याय [ १२५० ई० ] के लगभग समकालीन किन्तु कुछ बाद
के हैं। इसलिए 'पद्मनाभमिश्र' और उनके छोटे भाई केशवमिश्र दोनों का समय
१२७५ ई० के लगभग निश्चित किया गया है।
'वर्धमानोपाध्याय' नव्यन्याय की 'मैथिल शाखा' के पण्डित थे इसलिए
'पद्मनाभ मिश्र' तथा 'केशव मिश्र' को भी प्रायः मैथिल ही माना जाता है। इस
प्रकार तर्कभाषाकार केशवमिश्र १२७५ ई० के लगभग मिथिला में उत्पन्न हुए थे।