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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 330 में से

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पृष्ठ 63

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उनके पिता का नाम 'बलभद्र मिश्र' और दो बड़े भाइयों के नाम क्रमशः
'विश्वनाथ मिश्र' तथा 'पद्मनाभ मिश्र' थे। इनके शिष्य 'गोवर्धनमिश्र' थे जिन्होंने
इनकी 'तर्कभाषा' पर 'तर्कभाषाप्रकाश' नामक व्याख्या लिखी है। इतना ही
इनका परिचय इनके शिष्य 'गोवर्धन मिश्र' के द्वारा प्राप्त होता है।
तर्कभाषा की प्राचीन टीकाएँ—
केशव मिश्र की 'तर्कभाषा' में बहुत संक्षेप में और बहुत सुन्दर रूप से न्याय
के पदार्थों का प्रतिपादन किया गया है इसलिए इस पुस्तक ने विद्वानों में
अच्छा आदर पाया है। इसी कारण इस ग्रन्थ के ऊपर थोड़े से समय में ही
प्रायः चौदह टीका लिखी गई हैं। उनके नाम निम्न प्रकार हैं—
१ श्री गोवर्धनमिश्र कृत [ १३०० ] तर्कभाषा-प्रकाशिका ।
२ श्री गोपीनाथ कृत उज्ज्वला टीका।
३ श्री रोमबिल्व वेंकटबुद्ध कृत तर्कभाषा-भाव टीका ।
४ श्री रामलिंग कृत न्यायसंग्रह टीका ।
५ श्री माधवदेव कृत सारमञ्जरी ।
६ श्री भास्कर भट्ट कृत परिभाषादर्पण ।
७ श्री बालचन्द्र कृत तर्कभाषाप्रकाशिका ।
८ श्री चिन्नभट्ट कृत [ १३९० ] तर्कभाषाप्रकाशिका ।
९ श्री गणेशदीक्षित कृत तत्त्वप्रबोधिनी ।
१० श्री कौण्डिन्यदीक्षित कृत तर्कभाषाप्रकाशिका ।
११ श्री केशवभट्ट कृत तर्कदीपिका ।
१२ श्री गौरीकण्ठ सार्वभौम कृत तर्कभाषा-प्रकाशिका ।
१३ श्री नागेशभट्ट कृत [ १७१० ] युक्तिमुक्तावली टीका ।
१४ श्री विश्वकर्मा कृत न्यायप्रदीप ।
'तर्कभाषा' जैसी छोटी सी पुस्तक पर इतनी अधिक टीकाओं का लिखा
जाना उसकी लोकप्रियता और प्रौढ़ता का प्रमाण है। यह छोटा सा ग्रन्थ
भारतीय दर्शन का प्रवेश-द्वार है इसलिए सभी कलाकारों ने उसे अपनी-
अपनी व्याख्याओं द्वारा अलंकृत करने का यत्न किया है। जिस प्रकार विगत
७०० वर्षों से यह ग्रन्थ विद्वानों में आदर प्राप्त करता आ रहा है उसी प्रकार
आशा है इस नवयुग में भी इस नवीन व्याख्या से विभूषित यह ग्रन्थ विशेष
रूप से प्रचार और विद्वज्जनों द्वारा आदर प्राप्त करेगा ।
दीपावली २०१० विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि