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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 330 में से

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पृष्ठ 45

[ ४४ ]

बौद्ध न्याय के निर्माता आचार्य

२९ रत्नाकर शान्ति [ १०४० ई० ]—
अपर नाम कलिका सर्वज्ञ
१ विज्ञप्तिमात्रसिद्धि, २ अन्तर्व्याप्ति
३० यमारि [ १०५० ई० ]—
प्रमाणवार्तिकालङ्कार टीका
३१ शङ्करानन्द [ १०५० ई० ]—
१ प्रमाणवार्तिक टीका,
२ सम्बन्धपरीक्षानुसार
३ अपोह सिद्धि, ४ प्रतिबन्धसिद्धि
३२ शुभाकर गुप्त [ १०८० ई० ]—
जैन हरिभद्रसूरी [११२७] ने इनके
मत का उल्लेख किया है। ग्रन्थ नहीं
मिलता।
३३ मोक्षाकर गुप्त [ ११०० ई० ]—
तर्कभाषा
संस्कृत ग्रन्थ नहीं मिलता। तिब्बती
भाषा में अनुवाद पाया जाता है।
पुस्तक में तीन परिच्छेद हैं। जिनमें
क्रमशः—१ प्रत्यक्ष, २ स्वार्थानुमान,
३ परार्थानुमान का वर्णन है। अल्प-
बुद्धि बालकों को धर्मकीर्ति के
सिद्धान्तों का ज्ञान करने के लिए
लिखी है।

जैन न्याय के निर्माता आचार्य

२९ रत्नप्रभ सूरी [ ११८१ ई० ]—
‘स्याद्वादरत्नाकरावतारिका’
३० तिलकाचार्य [ ११८०-१२४० ई० ]
१ आवश्यकलघु वृत्ति
२ प्रत्येकबुद्धचरित
३१ मल्लिसैन सूरी [ १२९२ ई० ]—
‘स्याद्वाद मञ्जरी’
३२ राजशेखर सूरी [ १३४८ ई० ]—
‘रत्नावतारिका पञ्जिका’
‘न्यायकन्दली पञ्जिका’ [ वैशेषिक ]
३३ ज्ञानचन्द्र [ १३५० ई० ]—
‘रत्नावतारिका टिप्पण’
३४ गुणरत्न [ १४०९ ई० ]—
षड्दर्शन समुच्चय पर
तर्क रहस्य दीपिका वृत्ति
३५ श्रुतसागर गणी [ १४९३ ई० ]—
‘तत्त्वार्थ दीपिका’
३६ धर्मभूषण [ १६०० ई० ]—
न्याय दीपिका
३७ विनय विजय [१६१३-१६८१ ई०]—
‘न्यायकर्णिका’
३८ यशोविजयगणी [१६०८-१६८८ ई०]
१ न्याय प्रदीप, २ तर्कभाषा
३ न्यायरहस्य, ४ न्यायामृततरङ्गिणी
५ न्यायखण्ड खाद्य
६ अष्टसाहस्री विवरण, ७ न्यायालोक