तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ४२ ]
बौद्ध न्याय के निर्माता आचार्य
७ देवेन्द्रबोधि [ ६५० ई० ]—
प्रमाण वार्तिक पञ्जिका
८ शाक्यबोधि [ ६७५ ई० ]—
प्रमाण वार्तिक पञ्जिका टीका
९ विनीतदेव [ ७०० ई० ]—
१ न्यायविन्दु टीका, २ हेतु विन्दु
टीका, ३ वादन्याय व्याख्या, ४सम्बन्ध
परीक्षा टीका, ५ आलम्बन परीक्षा
टीका, ६ सन्तानान्तर सिद्धि टीका ।
१० रविगुप्त [ ७२५ ई० ]—
प्रमाण वार्तिक वृत्ति ।
११ जिनेन्द्र बोधि [ ७२५ ई० ]—
विशालामलवती नाम प्रमाण
समुच्चय टीका ।
१२ शान्त रक्षित [ ७४९ ई० ]—
१ तत्त्व संग्रह कारिका, २वादन्याय
वृत्ति विपञ्चितार्थ ।
१३ कमलशील [ ७५० ई० ]—
१ न्याय विन्दु पूर्वपक्ष संक्षिप्त
२ तत्त्वसंग्रह पञ्जिका ।
१४ कल्याण रक्षित [ ८२९ ई० ]—
१ सर्वज्ञसिद्धि कारिका, २ बाह्यार्थ
सिद्धि कारिका, ३ अन्यापोह विचार
कारिका, ४ ईश्वरभङ्ग कारिका,
५ श्रुतिपरीक्षा ।
१५ धर्मोत्तराचार्य [ ८४७-ई० ]—
१ न्यायविन्दु टीका, २ प्रमाणपरीक्षा,
३ अपोह नाम प्रकरणम्, ४ परलोक
सिद्धि, ५ क्षणभङ्गसिद्धि, ६ प्रमाण
विनिश्चय टीका ।
१६ मुक्ताकुम्भ [ ९०० ई० ]—
क्षणभङ्गसिद्धि व्याख्या ।
१७ अर्चट [ ९०० ई० ]—
हेतुविन्दु विवरण
जैन न्याय के निर्माता आचार्य
७ माणिक्यनन्दी [ ८०० ई० ]—
परीक्षामुख सूत्र या परीक्षा मुख शास्त्र
८ प्रभाचन्द्र [ ८२५ ई० ]
प्रमेय कमलमार्तण्ड [परीक्षामुखटीका]
न्यायकुमुद चन्द्रोदय [लघीयस्त्र टीका]
९ मल्ल वादिन् [ ८२७ ई० ]—
न्यायविन्दु टीका या धर्मोत्तर टिप्पण
१० रभस नन्दी [ ८५० ई० ]—
सम्बन्धोद्योत [सम्बन्धपरीक्षाकीटीका]
११ अमृतचन्द्र सूरि [ ९५० ई० ]—
१ तत्त्वार्थसार, २ आत्मख्याति
१२ देवसेन भट्टारक [८९९-९५० ई०]-
१ न्यायचक्र, २ दर्शनसार
१३ प्रद्यु