तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यकालीन न्याय के निर्माताओं का विवरण
पञ्चम शताब्दी के प्रारम्भ से सत्रहवीं शताब्दी तक के बौद्ध तथा जैन
न्यायाचार्यों के समयानुक्रम तथा ग्रन्थों का परिचय
बौद्ध न्याय के निर्माता आचार्य
१ दिङ्नाग [ ४५०-५२० ई० ]—
१ 'प्रमाण समुच्चय', २ प्रमाण समुच्चय
वृत्ति, ३ न्याय प्रवेश, ४ प्रमाण शास्त्र
न्यायप्रवेश, ५ हेतु चक्र, ६ त्रिकाल
परीक्षा, ७ आलम्बन परीक्षा, ८ आल-
म्बन परीक्षा वृत्ति ।
दिङ्नाग ने वात्स्यायन का खण्डन
किया है ।
२ परमार्थ [ ४९८-५६९ ]—
चीन देश को गया । वसुबन्धु
के 'तर्कशास्त्र' गोतम के 'न्यायसूत्र'
का चीनी भाषा में अनुवाद किया ।
'न्यायसूत्र' पर भाष्य भी लिखा ।
३ शङ्करस्वामी [ ५५० ई० ]—
दिङ्नाग के शिष्य हैं। 'हेतुविद्यान्यायप्रवेश-
शास्त्र' अपर नाम 'न्यायप्रवेश तर्कशास्त्र'
४ धर्मपाल [ ६००-६३५ ई० ]—
१ आलम्बनप्रत्यय ध्यानशास्त्रव्याख्या
२ विद्यामात्र सिद्धिशास्त्र व्याख्या
३ षट्शास्त्र वैपुल्य व्याख्या
५ आचार्य शीलभद्र [ ६३५ ई० ]—
नालन्दा विश्वविद्यालय में धर्मपाल
से अध्ययन कर वहाँ के आचार्य
बने ह्वेनत्सांग को पढ़ाया ।
६ आचार्य धर्मकीर्ति [ ६५० ई० ]—
१ प्रमाणवार्तिक कारिका, २ प्रमाण
वार्तिक वृत्ति, ३ प्रमाण विनिश्चय,
४ न्यायबिन्दु, ५ हेतुबिन्दु विवरण,
६ तर्क न्याय या वादन्याय, ७ सन्ता-
नान्तरसिद्धि, ८ सम्बन्ध परीक्षा
९ सम्बन्ध परीक्षा वृत्ति ।
जैन न्याय के निर्माता आचार्य
१ सिद्धसेन दिवाकर [४८०-५५० ई०]—
१ न्यायावतार
२ जिनभद्र गणी [ ४८४-५८८ ]
अपर नाम क्षमा श्रमण
आवश्यक निर्युक्ति पर 'विशेषावश्यक
भाष्य' नामक टीका
३ सिद्धसेन गणी [ ६०० ई० ]
उमास्वाति के 'तत्त्वार्थाधिगम सूत्र'
पर 'तत्त्वार्थ टीका'
४ समन्त भद्र [ ६०० ई० ]—
उमास्वाति के 'तत्त्वार्थाधिगम सूत्र पर
१ 'गन्ध हस्तीमहाभाष्य' नामक टीका
२ आप्त मीमांसा, ३ युक्तियानुशासन,
४ रत्नकरण्डक
५ अकलङ्क देव [ ७५० ई० ]—
१ आप्त मीमांसा पर अष्टशती टीका
२ न्याय विनिश्चय, ३ लघीयस्त्रय
४ तत्त्वार्थ वार्तिक व्याख्यानालङ्कार
५ अकलङ्कस्तोत्र, ६ स्वरूप सम्बोधन
६ विद्यानन्द [ ८०० ई० ]—
१ आप्तमीमांसालङ्कृतिया अष्टसहस्र
२ प्रमाण परीक्षा, ३ आप्त परीक्षा
४ तत्त्वार्थ श्लोक वार्तिक