सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 330 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 285

२२० तर्कभाषा [ समवायः
समवायः
अयुतसिद्धयोः सम्बन्धः समवायः । स चोक्त एव ।
नन्ववयवावयविनावप्ययुतसिद्धौ तेन तयोः सम्बन्धः समवाय
इत्युक्तम् । न चैतद् युक्तम् । अवयवातिरिक्तस्यावयविनोऽभावात् ।
परमाणव एव बहवस्तथाभूताः सन्निकृष्टाः घटोऽयं घटोऽयमिति गृह्यन्ते ।
अत्रोच्यते । अस्त्येकः स्थूलो घट इति प्रत्यक्षा बुद्धिः । न च सा
परमाणुष्वनेकेष्वस्थूलेष्वतीन्द्रियेषु भवितुमर्हति । भ्रान्तेयं बुद्धिरिति
चेत् । न । बाधकाभावात् ।
मानने की आवश्यकता नहीं है । अतः पृथिवी आदि पांच में ही 'विशेष'
के मानने की आवश्यकता होती है ।
समवाय
आगे समवाय का निरूपण करते हैं ।
'अयुत सिद्धों' का सम्बन्ध 'समवाय' होता है । उसका वर्णन किया जा
चुका है ।
[ प्रश्न ] अवयव और अवयवी भी 'अयुत-सिद्ध' हैं इसलिए उनका सम्बन्ध
'समवाय' है यह [ आपने पहिले समवाय के वर्णन के प्रसङ्ग में ] कहा था ।
परन्तु वह ठीक नहीं है क्योंकि अवयव के अतिरिक्त अवयवी [ घटादि ] की
कोई सत्ता नहीं है । [ यह बौद्धों का मत है । वह अवयवों के अतिरिक्त अवयवी
को नहीं मानते हैं । क्योंकि घटादि में अवयवी जैसी कोई वस्तु दिखाई नहीं
देती है । उनका कहना है कि ] बहुत से परमाणु ही उस [ घटादि ] के रूप में
एकत्रित होकर, यह घड़ा है, यह घड़ा है इस रूप में गृहीत होते हैं । [इसलिए उन
परमाणु रूप अवयवों के अतिरिक्त घट रूप कोई 'अवयवी' नहीं है ] ।
इस विषय में [ सिद्धान्तपक्ष से उत्तर ] कहते हैं । एक, स्थूल, घट है इस
प्रकार का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है । किन्तु [ अवयवी के बिना माने ] अनेक,
अस्थूल [ सूक्ष्म ] और अतीन्द्रिय परमाणुओं में वह [ अनेक परमाणुओं में
एकः, अ-स्थूल अर्थात् सूक्ष्म परमाणुओं में स्थूलः, और अतीन्द्रिय अप्रत्यक्ष
परमाणुओं में प्रत्यक्ष घटः यह प्रतीति ] नहीं बन सकती है । यह [ एकः स्थूलः
प्रत्यक्षः घटः इत्यादि ] बुद्धि, भ्रम है यह भी नहीं कह सकते हैं बाधक का
अभाव होने से ।
नैयायिकों के सिद्धान्तपक्ष का अभिप्राय यह है कि 'एकः, स्थूलः, प्रत्यक्षः,
घटः' इस प्रकार की प्रतीति केवल परमाणुओं में नहीं हो सकती है । अनेक