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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 330 में से

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पृष्ठ 279

२१४ तर्कभाषा [ सामान्यम्
अल्पविषयत्वात्। तच्च व्यावृत्तेरपि हेतुत्वात् सामान्यं सद् विशेषः।
सामान्य नहीं है। ] द्रव्यत्वादि [ अन्य सामान्य उसकी अपेक्षा अल्प देश-वृत्ति
होने से ] 'अपर' [ सामान्य ] हैं। और वह व्यावृत्ति [ भेदबुद्धि ] का भी हेतु
होने से सामान्य होते हुए [ भी ] विशेष [ होते ] हैं।
इसको स्पष्ट रूप से यों समझना चाहिए कि दस घट व्यक्तियों में 'घटः,
घटः' इस प्रकार की अनुगत प्रतीति या एकाकार प्रतीति होती है। उससे
घट में रहने वाला 'घटत्व' सामान्य सिद्ध होता है। परन्तु वह घट एक पार्थिव
पदार्थ है इसलिए उसमें 'पृथिवीत्व' सामान्य भी रहता है। 'घटत्व' सामान्य
केवल घटों में रहता है परन्तु 'पृथिवीत्व' सामान्य घट के अतिरिक्त पट, मठ,
आदि अन्य पार्थिव पदार्थों में भी रहता है। इसलिए 'पृथिवीत्व' सामान्य
'घटत्व' की अपेक्षा अधिक देशवृत्ति होने से 'पर' सामान्य माना जायगा।
पृथिवी की गणना नौ द्रव्यों में की गई है अतः पृथिवी भी एक द्रव्य है। और
अन्य द्रव्यों की भांति पृथिवी में भी 'द्रव्यत्व' सामान्य रहता है। पृथिवी में
'पृथिवीत्व' सामान्य है और 'द्रव्यत्व' सामान्य भी रहता है। इनमें से 'पृथि-
वीत्व' सामान्य तो केवल पृथिवी में रहता है परन्तु 'द्रव्यत्व' सामान्य पृथिवी
के अतिरिक्त जल, वायु, अग्नि, आदि अन्य आठ द्रव्यों में भी रहता है इसलिए
वह 'पृथिवीत्व' सामान्य की अपेक्षा अधिक देशवृत्ति होने से, 'पर सामान्य'
है। और 'पृथिवीत्व' सामान्य 'द्रव्यत्व' सामान्य की अपेक्षा 'अपर
सामान्य' है।
पृथिवी आदि द्रव्यों में द्रव्यत्व सामान्य के अतिरिक्त 'सत्ता' सामान्य भी
रहता है। क्योंकि पृथिवी आदि सभी द्रव्य 'सत्' है। अतः उनमें 'सत्ता'
सामान्य भी माना जाता है। इस प्रकार द्रव्यों में 'द्रव्यत्व' सामान्य, तथा
'सत्ता' सामान्य दो सामान्य रहते हैं। इनमें से 'द्रव्यत्व' सामान्य तो केवल
नौ द्रव्यों में रहता है परन्तु 'सत्ता' सामान्य नौ द्रव्यों के अतिरिक्त गुण और
कर्म में भी रहता है इसलिए 'सत्ता' सामान्य 'द्रव्यत्व' सामान्य की अपेक्षा 'पर
सामान्य' है और 'द्रव्यत्व' सामान्य, 'सत्ता' सामान्य की अपेक्षा 'अपर
सामान्य' है।
इस प्रकार घटमें १ 'घटत्व सामान्य' २ 'पृथिवीत्व सामान्य' ३ 'द्रव्यत्वसामान्य'
और ४ 'सत्ता सामान्य' यह चार सामान्य रहते हैं। इनमें से 'घटत्व सामान्य' सबसे
'अपर सामान्य' और सत्ता सामान्य सबसे 'पर सामान्य' है। बीच के 'पृथिवीत्व'
और 'द्रव्यत्व' सामान्य में आपेक्षिक 'परत्व' या 'अपरत्व' रहता है। 'पृथिवीत्व'