तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्दगुणः ] प्रमेयनिरूपणम् २०७
सत्यम् । भेरीदेशे जातः शब्दो वीचीतरङ्गन्यायेन कदम्बमुकुल-
न्यायेन वा सन्निहितं शब्दान्तरमारभते । स च शब्दः शब्दान्तर-
मितिक्रमेण श्रोत्रदेशे जातोऽन्त्यः शब्दः श्रोत्रेण गृह्यते न त्वाद्यो नापि
मध्यमः । एवं वंशे पाट्यमाने दलद्वयविभागदेशे जातः शब्दः शब्दान्तरा-
रम्भक्रमेण श्रोत्रदेशेऽन्त्यं शब्दं जनयति । सोऽन्त्यः शब्दः श्रोत्रेण गृह्यते
नाद्यो न मध्यमः। 'भेरीशब्दो मया श्रुत' इति मतिस्तु भ्रान्तैव । भेरीशब्दो-
त्पत्तौ भेर्याकाशसंयोगोऽसमवायिकारणं, भेरीदण्डसंयोगो निमित्तकारणम् ।
एवं वंशोत्पाटनाच्चटचटाशब्दोत्पत्तौ वंशदलाकाशविभागोऽसमवायि-
कारणं, दलद्वयविभागो निमित्तकारणम् । इत्थमाद्यः शब्दः संयोगजो
चारों दिशाओ में उत्पन्न होने वाले शब्दों की एक लहर सी प्रतीत होने लगती
है । जैसे यदि पानी में कोई पत्थर डाल दिया जाय तो उससे चारो ओर एक
लहर का चक्र सा बन जाता है ठीक उसी प्रकार की रचना इस चित्र के दिए
हुए चक्र की है । इसीलिए इस प्रकार की शब्द की गति के लिए प्राचीन
आचार्यों ने 'वीचीतरङ्गन्याय' शब्द का प्रयोग किया है। प्राचीन आचार्यों का
शब्दधारा का निरूपण आधुनिक विज्ञान से एक दम मिल गया आश्चर्य है ।
इसी का वर्णन ग्रन्थकार आगे करते हैं—
[ उत्तर ] आपका कथन ठीक है । परन्तु भेरी में उत्पन्न हुआ शब्द
'वीचीतरङ्ग न्याय' से अथवा 'कदम्बमुकुल न्याय' से समीपवर्ती दूसरे शब्द को
उत्पन्न करता है, और वह शब्द दूसरे शब्द को उत्पन्न करता है इस प्रकार क्रम
से श्रोत्र देश में उत्पन्न हुआ अन्तिम शब्द श्रोत्र इन्द्रिय से गृहीत होता है । आदि
या मध्यम शब्द नहीं । इसी प्रकार बांस के फाड़ते समय दोनों दलों के विभाग
देश में उत्पन्न शब्द दूसरे शब्द को उत्पन्न करने के क्रम से श्रोत्र देश में [ सुने
जाने वाले ] अन्तिम शब्द को उत्पन्न करता है । वह अन्त्य शब्द श्रोत्र इन्द्रिय
से गृहीत होता है । न आदि का और न बीच का । ] 'मैंने भेरी का शब्द सुना'
यह प्रतीति तो भ्रान्ति ही है [ क्योंकि भेरी से उत्पन्न शब्द गृहीत नहीं होता है
अपितु उस शब्दधारा में श्रोत्र देश में उत्पन्न होने वाला शब्द गृहीत होता है ]
भेरी शब्द की उत्पत्ति में भेरी और आकाश का संयोग असमवायि कारण है और
भेरी-दण्ड का संयोग निमित्त कारण है ।
इसी प्रकार बांस के फाड़ने से चट चट शब्द की उत्पत्ति में बांस के दल
और आकाश का विभाग असमवायिकारण और दोनों दलों का विभाग निमित्त
कारण है । इस प्रकार आदि शब्द संयोग अथवा विभाग से उत्पन्न होने वाला