तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०६ तर्कभाषा [ 'शब्दगुणः
दिशाओं में उत्पन्न होने वाले शब्द अलग-अलग से होते हैं । जैसा कि नीचे
दिए चित्र में स्पष्ट हो रहा है—
कदम्बमुकुल न्याय से शब्दधारा की गति
ऊपर एक चित्र दिया हुआ है। यह चित्र भौतिक विज्ञान के ग्रन्थ से
लिया गया है । आधुनिक वैज्ञानिक जिस रूप में शब्द की गति मानते हैं
उसका प्रदर्शन इस चित्र में किया गया है । 'वीचीतरङ्गन्याय' तथा 'कदम्ब-
मुकुल न्याय' दोनों का स्पष्टीकरण इस चित्र से भली प्रकार हो जाता है । इस
चित्र में घण्टे के पास में बिन्दुओं का चक्र दिखाई देता है कुछ दूर चलने के
बाद वह एक तरङ्ग के रूप में दिखाई देता है। इस प्रकार शब्द की गति के
दो रूप यहाँ दिखाई दे रहे हैं। इनमें से पहले स्वरूप को प्राचीन आचार्यों ने
'कदम्बमुकुलन्याय' और दूसरे को 'वीचीतरङ्गन्याय' नाम से प्रकट किया है ।
'कदम्ब-मुकुल' का अर्थ कदम्ब का फूल या कली है । कदम्ब के फूल की बना-
वट ठीक इसी प्रकार की होती है जैसी कि घंटे के पास की शब्द धारा में
दिखाई पड़ रही है । कदम्ब के फूल के सिर पर केन्द्र में एक कील सी खड़ी
होती है। फिर उसके चारो ओर उसी प्रकार की कीलें सी खड़ी होती हैं ।
देखने में ठीक ऐसी ही होती है जैसी घण्टे के पास की शब्द-धारा दिखाई दे
रही है । इसीलिए इस प्रकार की शब्दधारा को सूचित करने के लिए 'कदम्ब-
मुकुलन्याय' इस शब्द का विशेषरूप से प्रयोग किया गया है। चित्र में
चारो ओर अलग अलग बिन्दु दिखाई दे रहे हैं । इसलिए चारो ओर उत्पन्न
होने वाले शब्दों को अलग अलग भी कहा जा सकता है ।
थोड़ी दूर चलने के बाद चित्र में अलग-अलग बिन्दुओं के स्थान पर
एक वीची या लहर का चक्र सा दिखाई देने लगता है । अर्थात्