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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 330 में से

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१६६ तर्कभाषा [ द्वित्वविनाशप्रक्रिया
प्रथमक्षण में—इन्द्रिय और अर्थ का सन्निकर्ष होता है ।
द्वितीयक्षण में—'एकत्व-सामान्य-ज्ञान' उत्पन्न होता है ।
तृतीयक्षण में—एकत्वोभयगोचरा मतिः, अर्थात् 'अयमेकः, अयमेकः' इस
प्रकार की 'अपेक्षा-बुद्धि' उत्पन्न होती है ।
चतुर्थ क्षण में—१ द्वित्वोत्पत्तिः । २ एकत्वसामान्यज्ञान का नाश ।
३ द्वित्वसामान्यज्ञान की उत्पद्यमानता यह तीनों बातें एक साथ होती हैं ।
पञ्चम क्षण में—१ द्वित्वसामान्य ज्ञान की उत्पत्ति । २ 'अपेक्षा-बुद्धि' की
विनश्यमानता ३ द्वित्वगुण-बुद्धि की उत्पद्यमानता ये तीनों बातें एक साथ होती हैं ।
षष्ठ क्षण में— १ द्वित्वगुणबुद्धि की उत्पत्ति । २ अपेक्षा-बुद्धि का नाश,
३ 'द्वे द्रव्ये' इस ज्ञान की उत्पद्यमानता ये तीनों बातें एक साथ होती हैं ।
सप्तम क्षण में—१ 'द्वे द्रव्ये' ज्ञान की उत्पत्ति । २ द्वित्व का विनाश ।
३ द्वित्वगुण बुद्धि की विनश्यमानता ये तीनों बातें एक साथ होती हैं ।
अष्टम क्षण में—१ संस्कार की उत्पत्ति । २ द्वित्वगुणबुद्धि का विनाश,
३ 'द्वे द्रव्ये' इस ज्ञान की विनश्यमानता ये तीनों बातें एक साथ होती हैं ।
नवम क्षण में—'द्वे द्रव्ये' इस ज्ञान का संस्कार से विनाश हो जाता है ।
इस प्रकार अपेक्षा बुद्धि के नाश से जहाँ द्वित्व का विनाश होता है उसकी
यह नौ क्षण की प्रक्रिया दिखाई है । इसके अतिरिक्त कहीं आश्रय-नाश से भी
द्वित्व का नाश होता है उस की क्षणानुसारिणी प्रक्रिया निम्न प्रकार है ।}
आश्रय के नाश से द्वित्वका नाश—
प्रथम क्षण में—१ एकत्वाधार घटादि के अवयवों में कर्म की उत्पत्ति होती
है । २ उसी समय एकत्व सामान्य ज्ञान की उत्पत्ति होती है ।
द्वितीय क्षण में—१ कर्म से अवयवों के विभाग की उत्पत्ति । २ और
उसी समय एकत्व सामान्य ज्ञान से 'अपेक्षा-बुद्धि' की उत्पत्ति होती है ।
तृतीय क्षण में—१ विभाग से द्रव्यारम्भक संयोग का नाश । २ और
उसी समय 'अपेक्षा-बुद्धि' से द्वित्व की उत्पत्ति होती है ।
चतुर्थ क्षण में—१ द्रव्यारम्भक संयोग के नाश से द्रव्य का नाश । २ और
उसी समय द्वित्व सामान्य ज्ञान की उत्पत्ति होती है ।
पञ्चम क्षण में—१ आश्रयद्रव्य के ज्ञान से द्वित्व का नाश । २ और
द्वित्वसामान्यज्ञान से 'अपेक्षा-बुद्धि' का नाश होता है ।
इस प्रक्रिया से पञ्चम क्षण में एक ओर आश्रय द्रव्य के नाश से