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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 247, कुल 330 में से

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पृष्ठ 247

१८२ तर्कभाषा [ विनाशक्रमः
इत्थमुत्पन्नस्य रूपादिमतः कार्यद्रव्यस्य घटादेरवयवेषु कपालादिषु
नोदनादभिघाताद्वा क्रिया जायते । तया विभागस्तेनावयव्यारम्भक-
स्यासमवायिकारणीभूतस्य संयोगस्य नाशः क्रियते, ततः कार्यद्रव्यस्य
घटादेरवयविनो नाशः। एतेनावयव्यारम्भकासमवायिकारणनाशे द्रव्य-
नाशो दर्शितः ।
क्वचित् समवायिकारणनाशे द्रव्यनाशो यथा पूर्वोक्तस्यैव पृथिव्यादेः
संहारे सञ्जिहीर्षोर्महेश्वरस्य सञ्जिहीर्षा जायते । ततो द्व्यणुकारम्भकेषु
परमाणुषु क्रिया, तया विभागः, ततस्तयोः संयोगनाशे सति द्व्यणुकेषु
एक समवायिकारण के नाश से कार्य का नाश और दूसरा असमवायिकारण
के नाश से कार्य का नाश। साधारणतः घट आदि कार्यों का नाश उसके
असमवायिकारण अर्थात् अवयव-संयोग के विनाश से ही होता है। परन्तु
प्रलय काल में संसार का नाश प्रायः समवायिकारण के नाश से होता है। उस
समय परमात्मा की संहारेच्छा से विश्व के कारणभूत परमाणुओं में क्रिया
उत्पन्न होती है। उससे द्व्यणुकों के बनाने वाले संयुक्त परमाणुओं में विभाग,
और विभाग से द्व्यणुकारम्भक संयोग का नाश हो जाने से द्व्यणुकों का नाश
तो परमाणु-संयोग रूप असमवायिकारण के नाश से होता है। परन्तु द्व्यणुक
के बाद जो त्र्यणुक आदि का नाश होता है वह समवायिकारण रूप द्व्यणुक
आदि के नाश से होता है। इसलिए समवायिकारण और असमवायिकारण के
नाश से कार्य का नाश होने से कार्य का नाश की दो प्रकार की प्रक्रियाएँ
आगे दिखाते हैं। इनमें पहिले असमवायिकारण के नाश से कार्यनाश की
प्रक्रिया दिखलाते हैं।
इस प्रकार उत्पन्न हुए रूपादिमान् कार्यद्रव्य घट आदि के अवयव रूप कपाल
आदि में नोदन [ चेतन-प्रदत्त प्रेरणा ] अथवा अभिघात [ अचेतन पदार्थ के
साथ संघर्ष ] से क्रिया उत्पन्न होती है। उस से [ संयुक्त कपाल आदि अवयवों
में ] विभाग [ उत्पन्न होता है ] उस [ विभाग ] से अवयवी [ घट आदि ] के
आरम्भक [ असमवायि कारण ] संयोग का नाश होता है। उससे कार्यद्रव्य
घटादि अवयवी का नाश होता है। इस [ उदाहरण ] से अवयवी [ घट आदि ]
के आरम्भक [ कपाल आदि के संयोग रूप ] असमवायि कारण के नाश [ होने ]
से द्रव्य का नाश दिखलाया है।
कहीं समवायिकारण के नाश [ होने ] से भी द्रव्य का नाश [ होता है ]
जैसे पूर्वोक्त पृथिवी आदि के संहार में ही संहारेच्छुक परमात्मा में संहार की
इच्छा उत्पन्न होती है। उससे द्व्यणुकों के आरम्भक परमाणुओं में क्रिया, [ और ]
उससे विभाग [ उत्पन्न होता है ] उस के बाद उन दोनों [ परमाणुओं ] के संयोग