तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८० तर्कभाषा [ वायुद्रव्यम्
वायुत्वाभिसम्बन्धवान् वायुः । त्वगिन्द्रियप्राणवातादिप्रभेदः । स्पर्श-
संख्या-परिमाण-पृथक्त्व-संयोग-विभाग-परत्व-अपरत्व-वेगवान् । स च
स्पर्शाद्यनुमेयः । तथाहि योऽयं वायौ वाति, अनुष्णाशीतस्पर्श उपलभ्यते
स गुणत्वाद् गुणिनमन्तरेणानुपपद्यमानो गुणिनमनुमापयति । गुणी च
वायुरेव । पृथिव्याद्यनुपलब्धेः । वायुपृथिवीव्यतिरेकेण अनुष्णाशीत-
स्पर्शाभावात् । स च द्विविधो नित्याऽनित्यभेदात् । नित्यः परमाणुरूपो
वायुः, अनित्यः कार्यरूप एव ।
वायु-निरूपण—
वायुत्व जाति के सम्बन्ध से युक्त वायु [ कहलाता ] है । त्वगिन्द्रिय, प्राण,
तथा वात आदि [ विषय ] भेद से युक्त है। १ स्पर्श, २ संख्या, ३ परिमाण,
४ पृथक्त्व, ५ संयोग, ६ विभाग, ७ परत्व, ८ अपरत्व और ९ वेग [ इन नौ
गुणों ] से युक्त है । और वह स्पर्शादि से अनुमेय है। जैसे कि वायु के चलने
पर जो यह अनुष्ण अशीत स्पर्श प्रतीत होता है वह गुण होने से गुणी के बिना
अनुपपद्यमान होकर गुणी का अनुमान कराता है । और [ वह ] गुणी वायु
ही है । [ अनुष्णाशीतस्पर्श के अनुभव के स्थल में ] पृथिवी आदि की उपलब्धि
न होने से । पृथिवी और वायु के बिना अनुष्णाशीत स्पर्श का अभाव होने से ।
[ हवा चलते समय जो स्पर्श का अनुभव होता है उसका आश्रय वायु ही है ] ।
और वह नित्य तथा अनित्य भेद से दो प्रकार का होता है । परमाणु रूप वायु
नित्य है और कार्यरूप वायु अनित्य है ।
अर्थात् नौ द्रव्यों में से १ आकाश, २ काल, ३ दिक्, ४ आत्मा, और
५ मन इन पांच द्रव्यों में तो स्पर्श रहता ही नहीं है । इसलिए १ पृथ्वी,
२ जल, ३ वायु और ४ अग्नि इन चार द्रव्यों में ही स्पर्श रहता है । उन में
भी अग्नि का स्पर्श उष्ण और जल का स्पर्श शीत होता है । पृथ्वी और वायु
इन दोनों का अनुष्ण-अशीत स्पर्श होता है । वायु के चलने पर जो अनुष्णा-
शीत स्पर्श अनुभव होता है वह अनुमान होता है। इस प्रकार परिशेषानुमान
से वायु की सिद्धि होती है ।
स्थूल भूतों की उत्पत्ति का क्रम—
इस प्रकार १ पृथ्वी, २ अप्, ३ तेज और ४ वायु इन चार द्रव्यों का निरू-
पण हो गया । आगे उनकी उत्पत्ति तथा विनाश का क्रम कहते हैं । न्याय
और वैशेषिक के मत में सबसे सूक्ष्म और नित्य प्राकृतिक तत्त्व परमाणु है ।