तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विधम् ।->तच्चतुर्विधम् । १ उद्भूतरूपस्पर्शम् । २ अनुद्भूतरूपस्पर्शम् । ३ अनुद्भूतरूप- और १४ संस्कार ] से युक्त हैं । [ वह ] नित्य और अनित्य [ दो प्रकार के ] है । [ नित्य परमाणु रूप और अनित्य कार्य रूप होते हैं ] । नित्य [ अर्थात् परमाणु रूप ] के रूपादि गुण नित्य ही [ होते ] हैं और अनित्य [ कार्य रूप जलों ] के रूपादि गुण [ भी ] अनित्य ही होते हैं । तेजोनिरूपण— तेजस्त्व [ अग्नित्व ] सामान्य से युक्त तेज [ होता ] है । [ वह भी शरीर, इन्द्रिय और विषय भेद से ती प्रकार का होता है । ] चक्षु [ इन्द्रिय ], शरीर [ सूर्यलोक-वासियों के शरीर तैजस शरीर होते हैं ] और सूर्य, सुवर्ण, अग्नि, विद्युत् आदि [ विषय रूप ] भेदों से युक्त होता है । १ रूप, २ स्पर्श, ३ संख्या, ४ परिमाण, ५ पृथक्त्व, ६ संयोग, ७ विभाग, ८ परत्व, ९ अपरत्व, १० द्रवत्व,