सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 330 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 239

१७४ तर्कभाषा [ पीलूपाकपिठरपाकौ
होते हैं वे पाक अर्थात् तेजःसंयोग से ही उत्पन्न होते हैं। उनके पहिले रूप,
रस आदि नष्ट होकर पाक से उनमें नए रूप, रस आदि उत्पन्न होते हैं।
इसलिए वे सब 'पाकज' कहलाते हैं। यह 'पाकज' गुण केवल पृथ्वी में ही
रहते हैं अन्यत्र नहीं। यह 'पाकज' पद की साधारण व्याख्या हुई ।
'पीलूपाक' तथा 'पिठरपाक'—
कच्चा घड़ा जब 'अवाँ' में पकाया जाता है तब उसका श्याम रूप नष्ट
होकर अग्नि संयोग से उसमें रक्त रूप उत्पन्न हो जाता है। इसलिए घट के
रूप आदि चारों गुण 'पाकज' गुण हैं। परन्तु श्यामरूप नष्ट होकर रक्त रूप की
उत्पत्ति किस प्रकार होती है उसकी प्रक्रिया में न्याय तथा वैशेषिक दर्शन में
थोड़ा भेद पाया जाता है। और इस विषय में दोनों के सिद्धान्त अलग अलग
नाम से प्रसिद्ध हैं। पाकजोत्पत्ति के विषय में वैशेषिक दर्शन का सिद्धान्त
'पीलूपाक' कहलाता है। 'पीलू' शब्द का अर्थ परमाणु है। 'पीलूपाक' अर्थात्
परमाणुओं का पाक । वैशेषिक के मतानुसार परमाणुओं का पाक होता है।
'पाकज' रूप रस आदि गुण परमाणुओं में पैदा होते हैं। पिण्ड रूप घटादि में
नहीं। इसके विपरीत नैयायिकों के सिद्धान्त में पाकज गुणों की उत्पत्ति
परमाणुओं में नहीं अपितु घट के सम्पूर्ण 'पिण्ड' में होती है : इसलिए न्याय
का सिद्धान्त 'पिठरपाक' नाम से प्रसिद्ध है। 'पिठर' शब्द का अर्थ है पिण्ड
अर्थात् न्याय के मत में पाक परमाणुओं का नहीं किन्तु सम्पूर्ण घट पिण्ड का
होता है। इसलिए न्याय के सिद्धान्त को 'पिठरपाक' कहते हैं।
वैशेषिक का पीलुपाक—
वैशेषिक दर्शन के पीलुपाक' सिद्धान्त के अनुसार 'पाकज' गुण परमाणुओं
में उत्पन्न होते हैं अविभक्त पूर्ण घट में नहीं। घड़े के परमाणुओं में श्याम
रूप का नाश होकर रक्त रूप की उत्पत्ति हो सके इसके लिए प्रत्येक परमाणु
के बीच अग्नि का प्रवेश आवश्यक है। अतएव वैशेषिक की प्रक्रिया में
पकते समय घड़े के परमाणुओं के घटारम्भक संयोग का नाश होकर
उसके परमाणु अलग अलग हो जाते हैं। तब उन विभक्त परमाणुओं में
श्याम रूप का नाश होकर नए रक्त रूप की उत्पत्ति होती है। और
फिर वह रक्त परमाणु मिलकर घट को पुनः निर्मित करते हैं। इस प्रक्रिया के
अनुसार घड़े के पकते समय 'आँवाँ' के भीतर एक बार कच्चे घड़े के सब
परमाणु अलग अलग हो जाते हैं। अर्थात् घट का नाश हो जाता है। फिर
उन विभक्त परमाणुओं में 'पाकज' रक्त रूप की उत्पत्ति हो जानेके बाद, प्राणियों