तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपाकजोत्पत्तिः ] प्रमेय निरूपणम् १७३
रस-गन्ध-स्पर्शा अनित्याः पाकजाश्च । पाकस्तु तेजः संयोगः, तेन
पृथिव्याः पूर्व रूपादयो नश्यन्त्यन्ये जन्यन्त इति पाकजाः ।
वह दो प्रकार की है नित्य और अनित्य । नित्य परमाणु रूप और अनित्य कार्यरूप
[ पृथिवी ] है । [ नित्य और अनित्य ] दोनों प्रकार की पृथिवी के रूप, रस,
गन्ध, स्पर्श, [ यह चारों गुण ] अनित्य और पाकज [ ही ] होते हैं ।
[ पाकज में ] पाक [ शब्द का अर्थ ] तो तेजःसामान्य [ अग्नि सामान्य ] का
संयोग है । उस [ तेज अर्थात् अग्नि ] के संयोग से पृथिवी [ पार्थिव घट आदि ]
के पूर्व [ श्याम ] रूप आदि [ कच्चे घड़े का श्याम रूप, विशेष प्रकार का
रस, गन्ध तथा स्पर्श ] नष्ट हो जाते हैं और [ उनके स्थान पर रक्त रूप, कठोर
स्पर्श, विशेष प्रकार का रस और गन्ध, आदि ] दूसरे [ गुण ] उत्पन्न हो जाते
हैं । [ इसीलिए पाक अर्थात् अग्नि संयोग से उत्पन्न होने के कारण वह 'पाकज'
गुण कहलाते हैं ] ।
यह जो द्रव्य आदि के निरूपण का प्रकरण चल रहा है वह वैशेषिक
सिद्धान्त के अनुसार लिखा जा रहा है यह बात पहिले कह चुके हैं। वैशेषिक
दर्शन में १ द्वित्व, २ पाकजोत्पत्ति, तथा ३ विभागजविभाग इन तीनों का
बड़ा विस्तृत विवेचन किया गया है। और उनके उत्पत्ति तथा विनाश की
बड़ी जटिल प्रक्रिया वैशेषिक के प्रशस्तपाद भाष्य में प्रदर्शित की गई है ।
इसलिए यह तीनों वैशेषिक दर्शन के मुख्य विषय समझे जाते हैं। और
वैशेषिक दर्शन के पाण्डित्य की परीक्षा उनके परिज्ञान के आधार पर ही होती
है । इसलिए यह श्लोक प्रसिद्ध है कि—
द्वित्वे १ च पाकजोत्पत्तौ विभागे च विभागजे ।
यस्य न स्खलिता बुद्धिस्तं वै वैशेषिकं विदुः ॥
पाकजोत्पत्ति—
इन तीन विषयों में से पाकजोत्पत्ति भी एक विषय है। इसलिए उसको
ठीक तरह से समझ लेना चाहिए । पृथ्वी में रहने वाले रूप, रस, गन्ध तथा
स्पर्श यह चार ही गुण 'पाकज' अर्थात् अग्नि संयोग से उत्पन्न माने जाते हैं ।
कच्चा फल हरा होता है पक कर वह पीला या लाल आदि हो जाता है । कच्चे
फल के रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श से पके फल के रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श
सब ही भिन्न होते हैं। फलों के पकने का कारण गर्मी अथवा तेजःसंयोग
ही है यह स्पष्ट है। अतएव पके फल में जो विशेष रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श
१ सर्वदर्शनसंग्रह पृ० २२० ।