तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३० तर्कभाषा [ प्रामाण्यवादः
एक चौथा पक्ष शेष रह जाता है । सर्वदर्शन संग्रह में 'सौगताश्चरमं स्वतः' १
लिख कर बौद्धों को इस चतुर्थ पक्ष का मानने वाला बताया है ।
परन्तु बौद्ध आचार्य शान्त रक्षित ने 'तत्त्वसंग्रह' २ में बौद्ध मत को इन
चारों पक्षों से विलक्षण दिखाया है । वह लिखते हैं, -
'न हि बौद्धैरैषां चतुर्णामेकतमोऽपि पक्षोऽभीष्टः । अनियमपक्षस्येष्टत्वात् ।
तथाहि, उभयमप्येतत् किञ्चित् स्वतः, किञ्चित् परतः, इति पूर्वमुपवर्णितम् ।
अत एव पक्षचतुष्टयोपन्यासोऽप्ययुक्तः । पञ्चमस्याप्यनियमपक्षस्य सम्भवात् ।'
अनियम पक्ष का अभिप्राय यह है कि अभ्यासदशापन्न ज्ञान में प्रामाण्य
अप्रामाण्य दोनों स्वतः और अनभ्यासदशापन्न ज्ञान में दोनों परतः हैं । जैन
परम्परा में आचार्य हेमचन्द्र ३ ने इसी रूप से तथा आचार्य देवसूरि ने उत्पत्ति
और ज्ञप्ति भेद से प्रामाण्य को स्वतः तथा परतः इन दोनों प्रकार का माना है-
तत्प्रामाण्यं ४ स्वतः परतश्चेति ।
तदुभयमुत्पत्तौ ५ परत एव ज्ञप्तौ तु स्वतः परतश्चेति ।
इस प्रकार प्रामाण्यवाद के विषय में कुल छः पक्ष बन जाते हैं-
१ न्याय पक्ष में प्रामाण्य और अप्रामाण्य दोनों परतः हैं ।
२ सांख्य पक्ष में प्रामाण्य और अप्रामाण्य दोनों स्वतः हैं ।
३ मीमांसक पक्ष में प्रामाण्य स्वतः तथा अप्रामाण्य परतः है ।
४ बौद्धैकदेशी पक्ष में अप्रामाण्य स्वतः और प्रामाण्य परतः है ।
५ बौद्धपक्ष [शान्तरक्षित] में अभ्यासदशापन्न ज्ञान में दोनों स्वतः और
अनभ्यासदशापन्न ज्ञान में दोनों परतः हैं ।
६ जैनपक्ष में उत्पत्ति में दोनों परतः और ज्ञप्ति में दोनों स्वतः हैं ।
तर्कभाषाकार ने वहाँ जो प्रामाण्य चर्चा का विषय उठाया है वह मुख्यतः
मीमांसकों के 'स्वतः प्रामाण्यवाद' का निराकरण करने के लिए उठाया है ।
इसलिए अन्य पक्षों की चर्चा नहीं की है ।
हमने अपनी दर्शन मीमांसा में प्रामाण्यवादविषयक इन विभिन्न मतों का
संकलन इस प्रकार किया है-
प्रमाणत्वाप्रमाणत्वं सांख्ये योगे स्वतो मतम् ।
तदेव परतो ज्ञेयमुभयं गौतमे नये ॥
१ सर्व० द० पृ० २७९
२ तत्त्वसंग्रह कारिका ३१२३
३ प्रमाणमीमांसा १, १, ८ । ४ परी० १, १३ । ५ प्रमाणन० १, २१ ।
६ दर्शन मीमांसा ५ ।