तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ तर्कभाषा [ प्रत्यक्षे पाश्चात्यमतम्
त्मनोऽर्थस्य विशेषावधारणप्रधाना वृत्तिः प्रत्यक्षं प्रमाणम् । फलमविशिष्टः पौरुषे-
यश्चित्तवृत्तिबोधः' ।
वाचस्पति मिश्र तथा विज्ञानभिक्षु का मतभेद—
बुद्धिवृत्ति का पुरुष अथवा आत्मा के साथ सम्बन्ध किस प्रकार होता है
इस विषय में सांख्य के आचार्यों में दो प्रकार के मत हैं। 'वाचस्पति मिश्र' के
मत से 'बुद्धिवृत्ति' में पुरुष का प्रतिबिम्ब होता है और सांख्य सूत्रों के 'सांख्य-
प्रवचन भाष्य' के लेखक श्री विज्ञान भिक्षु ने पुरुष में चित्तवृत्ति का प्रतिबिम्ब
माना है। वाचस्पति मिश्र ने सांख्यतत्त्वकौमुदी [पाँचवीं कारिका की व्याख्या]
में प्रत्यक्ष का निरूपण करते हुए लिखा है।
'सोऽयं बुद्धितत्त्ववर्तिना ज्ञानसुखादिना तत्प्रतिबिम्बितस्तच्छायापत्त्याज्ञा-
नसुखादिमानिव भवति' ।
'तत्प्रतिबिम्बितः' पद से वाचस्पति मिश्र ने अन्तःकरण अथवा बुद्धिवृत्ति में
पुरुष के प्रतिबिम्ब का निर्देश