तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिमित्तकारणम् ] प्रमाणनिरूपणम् ३६
निमित्तकारणं तदुच्यते। यन्न समवायिकारणं, नाप्यसमवायिकारणम्।
अथ च कारणं तन्निमित्तकारणम्। यथा वेमादिकं पटस्य निमित्तकारणम्,
तदेतद् भावानामेव त्रिविधं कारणम्। अभावस्य तु निमित्तमात्रं,
तस्य क्वचिदप्यसमवायात्। समवायस्य भावद्वयधर्मत्वात्।
तदेतस्य त्रिविधस्य कारणस्य मध्ये यदेव कथमपि सातिशयं तदेव
करणम्। तेन व्यवस्थितमेतल्लक्षणं प्रमाकरणं प्रमाणमिति।
यत्तु, अनधिगतार्थगन्तृ प्रमाणमिति लक्षणम्, तन्न, एकस्मिन्नेव घटे
घटोऽयं घटोऽयमिति धारावाहिकज्ञानानां गृहीतग्राहिणामप्रामाण्य-
प्रसङ्गात्।
निमित्तकारण उसको कहते हैं। जो न समवायिकारण है और न असम-
वायिकारण है। फिर भी जो कारण है [ अर्थात् जिसमें कारण का लक्षण
'अनन्यथासिद्धनियतपूर्वभावित्वम्' घट जाता है ] उसको निमित्तकारण कहते हैं।
जैसे वेमा आदि पट के निमित्तकारण हैं।
यह तीन प्रकार के [ समवायि, असमवायि और निमित्त ] कारण, भाव
[ अर्थात् सत् ] पदार्थों के ही होते हैं। [ अर्थात् अभाव के नहीं ] अभाव का
तो केवल [ एक ] निमित्त कारण ही होता है। उस [ अभाव ] का कहीं भी
[ किसी भी पदार्थ के साथ ] समवाय सम्बन्ध न होने से [ कोई पदार्थ उसका
समवायिकारण नहीं हो सकता है। और जब समवायिकारण ही नहीं तब असम-
वायिकारण भी नहीं हो सकता है। इसलिए अभाव का केवल निमित्तकारण ही
होता है ]। समवाय के दो भाव पदार्थों का ही धर्म होने से। [अभाव का किसी
से समवाय सम्बन्ध नहीं हो सकता है। और उसके अभाव में समवायि अथवा
असमवायिकारण नहीं बन सकने से अभाव का केवल एक निमित्तकारण ही
होता है। त्रिविध कारण केवल भाव पदार्थों के होते हैं। अभाव के नहीं ]।
इसलिए इस त्रिविध कारण में से जो [ कारण ] किसी प्रकार से भी [अन्यों
की अपेक्षा ] अधिक उत्कृष्ट [ कारण ] है, वही करण [ कहलाता ] है।
इसलिए [ अब प्रमा और करण दोनों पदों की पूर्ण व्याख्या हो जाने से ]
प्रमा का करण प्रमाण [ होता ] है यह [ प्रमाण का ] लक्षण निश्चित हो गया।
और जो [ यह भट्टमतानुयायी मीमांसकों तथा दिङ्नाग आदि बौद्ध आचार्यों
ने] अनधिगत अर्थात् अज्ञात अर्थ के ज्ञापक को प्रमाण कहते हैं यह लक्षण किया
है वह ठीक नहीं है। एक ही घट में [ निरन्तर कई क्षण तक ] यह घड़ा है,
यह घड़ा है इस प्रकार ज्ञात घट का ज्ञान कराने वाली धारावाहिक [ द्वितीय