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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 722, कुल 914 में से

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पृष्ठ 722

(the स is cut off at the left margin).

Line 26:
ध्ये ऋषिरुतत्तन्गोत्रप्रवर्तको वसिष्ठादिरूपो बभूव । मृगाणां चतुष्पदां मध्ये शक्त्या-
Wait, line 25 ends with: ब्राह्मणानां
Line 26 starts with: ध्ये -> [म]ध्ये!
Then: ऋषिस्तत्तद्गोत्रप्रवर्तको
Wait, let's look at ऋषिस्तत्तद्गोत्रप्रवर्तको:
ऋषिस्तत्तद्गोत्रप्रवर्तको or ऋषिस्तत्तत्गोत्र? It's ऋषिस्तत्तद्गोत्रप्रवर्तको.

Line 27:
धिक्येन युक्तो महिषो बभूव । गृध्रोपलक्षितानां सर्वेषां पक्षिणां मध्ये प्रबलः श्येनो
Wait, line 26 ends with: शक्त्या-
Line 27 starts with: धिक्येन ([अ]धिक्येन -> शक्त्याधिक्येन).

Line 28:
भूव । वनानां वृक्षसमूहरूपाणां मध्ये छेदनार्थः स्वधितिः परशुर्बभूव । यागहेतुभू-
Wait, line 27 ends with: श्येनो