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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 416

र्गे" or "मर्गो"?
Wait, look at the very first character of L28:
There is a clipped curve, then "मर्गो" or "मार्गो"?
Wait, the 'आ' matra might be clipped or it's "मार्गो":
"मार्गो निष्पादको योऽग्निस्तस्मै कर्मकृते स्वाहुतमिदमस्तु ।"
Yes, "मार्गो निष्पादको"!
And before "मार्गो" at the end of L27:
"पूर्वानुष्ठितकर्मणामेतस्य च"
L28: "मार्गो निष्पादको योऽग्निस्तस्मै कर्मकृते स्वाहुतमिदमस्तु । यं वाऽन्यदेवमत्रोपयुक्तं"
L29: "यं नाधीमो न स्मरामस्तस्मै स्वाहुतमिदमस्तु ।"
Wait, at the start of L29:
"यं" - yes, "यं नाधीमो न स्मरामस्तस्मै स्वाहुतमिदमस्तु ।"

Let's double-check the header:
[प्रपा० ६ अनु० २] कृष्णयजुर्वेदीयं तैत्तिरीयारण्यकम् । ४१३
Note the page number: ४१३.

Let's check L2:
कल्पः—"अथान्यां जुहोति—अ॒यं वै त्वम॒स्माद॑धि॒ त्वमे॒तद॑यं वै तद॒स्य योनि॑-
Wait, is there a