स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(४६)
बहु विस्तार रूप सब तिन के, जानत जे गुन धारी ।
यै चौबीस मुख्य ऐ तिन में, यह निश्चै जिय जानौ ।
दस नीचै दस ऊचै निकसी कमल नाभि ते मानों ।
दो-दो पुनि उत्तर अरु दक्षिण, जानौ सदा सुहाई ।
तिन में दस प्रधान अति मानौ, पार्वती मन भाई ।
तिन दस के अब नाम बखानौ, सुनौ प्रिया सुखदानी ।
इडा (१) पिगिला (२) सुषमना (३) गंधारी (४) मनमान बहुरि हस्तिचिक्का
(५) और पूषा (६) पुनि जसस्वनी (७) जानौ । है अलबुषा (८) कूहू (९) संखिनी ।
(१०) ये दस नाडी बखानौ ।
जौ तुम ये नाडी दस जानी, पवनहु दस परधाना । तिन हुं के अब
नामहि सुनियै, जेहि विधि कहत सुजाना ।
प्राण (१) (अपान) (२) उदान (३) समानह (४) मान (५) नाग (६)
पहियानौ । कूरम (७) क्रकल (८) धनंजय (९) है पुनि, देवदत्त (१०) उरआनौ ।
सुनि गिरिजा पावन मति तेरी, ये दस पवन विचारौ ।
अब इनिके अरु सब नाडिनि केई, प्रभाव हिय धारौ ।
बाँमें भाग इडा तुम जानौ, नाडी पिगिल दक्षिण ।
मधि सुषमना नैहचै जानौ मानौ गुनी विचक्षण ।
बाम चक्षु गंधारी कहियै, हस्ति जिह्वा पुनि दायै ।
पूषा कर्न दाहिने लहीयै, पुनि जसस्विनी बायै ।
नाभि माहि थिति है अलबुषा, कूहू लिंग में जानौ ।
मूल स्थान संखिनी तिष्ठै, यह निश्चै मन मानौ ।
नाडी अस्थान
प्राण पवन सौ बसै हृदे में, गुदा अपान बखानौ ।
पुनि समान सो नाभि देस में, कंठ उदान सो मानौ ।
सर्व सरीर मान सो व्योमे, पंच पवन परवाना ।