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सर्वकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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विज्ञान)

(स्वरोदय विज्ञान)

(४७)

तिनि में। महा सुजान जीवनराम जानिये।
परमारथी सुबुधी सुधी सुबखानिये।
तिनि येक धोस मोसो कहीये सुनाइकैं।
भाषा में स्वरोदय सो मुझे दे बनाइकैं।
जदपि में कहौ मित्र गुनी कौ कियौ।
श्री कृष्ण की कृपा सै जथा मत सौ करि दियौ।
जानौ नहीं मैं तो कछू छन्द रीति को।
टारौ न वचन मैंने देवता की प्रतीति कौ।
यह ज्ञान दीप गूँथ रचो हे बनाइकैं।
जों में सुखद प्रकास, तिमिर दे नसाइकैं।

सोरठा

षट् प्रकास सुख कंद, कहौ मित्र षट् छन्द करि।
कृपा करी ब्रज चंद, दीप प्रकासौ ज्ञान तब।

नाग स्वरूपिनी छन्द

सूनौ जु ज्ञान दीपकैं। सुबुधि के समीप कैं।
प्रकास होत लोक मैं। रहै न चित्त सोक मैं।

अरिल्ल

अष्ट दस संत अष्ट सु संवत जानिये।
चैत्र शुक्ल तिथि तीज वार ससि मानिये। (१८०८)

दोहा

अब सुनि ककुभा छन्द करि कहियत प्रथम प्रकास।
यह नाडी स्वर भेद सब भाषे शिव सुखरास।

ककुभाछन्दः पार्वत्युवाच