स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञान)
धर्मसुतै जुद्ध जितायौ उन्हीं ।
राखि लियौ आगितै पैहेलाद कौ ।
टारि दियौ दैत्य की मर्जाद कौ ।
भगतनि के हेत देह धरी जू ।
मतमंद जु उनि सौ न करै नेहजू ।
जानत हो स्याम सवै चित की ।
लाज तुम ही कौ पतित भक्त की
दास रिषीकेश तुम्हारौ जु है ।
तुम तौ बहुत काल नियारौ जु है ।
वेगि दया सिंध दया कीजिये ।
चाहत हो आई दरस दीजिये ।
देखौ न कोऊ और दुख हरन ।
या ते आई परौ तिहारे सरन ।
सरण आये की लाज कीजिये ।
ज्ञान ध्यान देव मोहि भक्ति दीजिये ।
सोरठा
ज्ञान दीप सुख रास, जीवनराम स्नेह सौ ।
जैसे कियौ प्रकास, सुनीयै सो सब कहत हौ ।
नवल छन्द
जमुना के तीर मित्र आगरी बसै ।
जेते नगर है आगरो सुन्दर लसै ।
जानो निवास दास रिषीकेश को वही ।
गुर के प्रसाद कछू ग्यान रीति मैं लही ।
जे मित्र है दयाल जे दया सवै करौ ।
दर्शन दिखाइ दुख विविध दास के हरौ ।