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सर्वकोश
सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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१६० सूरसागर सार सटीक
अनेक भाव दिखायेगे । सूरदास कहते हैं (गोपी कहती है) नवल तथा श्रेष्ठ कृष्ण
पीताम्बर फहरायेगे ॥३४॥
माता की सीख
काहे कौं पर-घर छिनु-छिनु जाति ।
घर मैं डांटि देति सिख जननी, नाहिंन नैंकु डराति ।
राधा-कान्ह कान्ह राधा व्रज, ह्वै रह्यौ अतिहि लजाति ।
अब गोकुल की जैबौ छाँड़ौ, अपजस हू न अघाति ।
तू वृषभानु बड़े की बेटी, उनकैं जाति न पांति ।
सूर सुता समझावति जननी, सकुचति नहिँ मुसुकाति ॥३५॥
अर्थ—दूसरे के घर क्षण-क्षण क्यो जाती हो । घर मे माता फटकार कर सीख
देती है कि तुम तनिक भी नही डरती हो । राधा-कृष्ण और कृष्ण-राधा यही चर्चा
व्रज मे व्याप्त हो गयी है, इससे (मुझे) अत्यधिक लाज लगती है । अब गोकुल का
जाना छोड़ दो, अपयश से (तुम) नही अघाती हो । तुम श्रेष्ठ वृषभानु की बेटी हो,
उन (कृष्ण) की जाति-पांति का कुछ ठीक नही है । सूरदास कहते हैं कि माता पुत्री को
समझाती हैं । इससे राधा सकुचाती नही (बल्कि) मुसकाती है ॥३५॥
खेलन कौं मैं जाउं नहीं ?
और लरिकिनी घर घर खेलति, मोहीँ कौं पै कहति तुहीँ ।
उनकैं मातु पिता नहिं कोई, खेलत डोलतिँ जहाँ तहीँ ।
तोसी महतारी वहि जाइ न, मैं रहौँ तुमहीँ बिनुहीँ ।
कबहूँ मोकौं कछू लगावति, कबहूँ कहति जनि जाहु कही ।
सूरदास बातैँ अनखौहीँ, नाहिंन मो पै जाति सही ॥३६॥
अर्थ—(राधा कहती है) मैं खेलने न जाऊँ ?-और लड़कियां घर-घर खेलती
हैं; किन्तु तुम मुझे ही कहती हो । (क्या) उनके माता-पिता नही है, जहां-तहां खेलती
डोलती हैं । तुम्हारी जैसी मां मर जाय, मैं तुम्हारे बिना ही रहूँगी । कभी मुझे कुछ
लगाती हो, कभी कहती हो कही खेलने मत जाओ । सूरदास कहते हैं (राधा कहती है)
यह क्रोध दिलाने वाली बात मुझसे सही नही जाती ॥३६॥
मनहौँ मन रीझति महतारी ।
कहा भई जौ बाढ़ि तनक गई, अबहौँ तौ मेरी है वारी ।
झूठैँ हीँ यह बात उड़ी है, राधा-कान्ह कहत नर नारी ।
रिस की बात सुता के मुख की, सुनत हँसति मनहीँ मन भारी ।
अब लौँ नहीँ कछू इहिँ जान्यौ, खेलत देखि लगावैँ गारी ।
सूरदास जननी उर लावति, मुख चूमति पोँछति रिस टारी ॥३७॥
अर्थ—मन-ही-मन माता रीझती है । क्या हुआ जो तनिक बढ़ गयी, अभी तो
मेरी लड़की का बचपन ही है । यह बात झूठ ही उड़ गयी है और नर और नारी राधा