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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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पृष्ठ 148

राधाकृष्ण १४७
दधी की चोरी करते फिरते हुए नन्द के पुत्र (कृष्ण) की कहानी सुनती रहती हूँ।
(कृष्ण कहते हैं) मैं तुम्हारा क्या चुरा लूंगा, साथ मिलकर खेलने चलें। सूरदास कहते
हैं कि रसिक शिरोमनि कृष्ण ने भोली राधा को बातो से ही फुसला लिया ॥२॥
प्रथम सनेह दुहुँनि मन जान्यौ।
नैन नैन कीन्ही सब बातैँ, गुप्त प्रीति प्रगटान्योँ।
खेलन कबहुँ हमारैं आवहु, नंद-सदन, ब्रज गाउँ।
द्वारैं आइ टेरि मोहिँ लीजौ, कान्ह हमारौ नाउँ।
जौ कहियै घर दूरि तुम्हारौ, बोलत सुनियै टेरि।
तुमहिँ सौँह वृषभानु बबा की, प्रात-साँझ इक फेरि।
सूधो निपट देखियत तुमकौँ, तातैँ करियत साथ।
सूर स्याम नागर-उत नागरि, राधा दोउ मिलि गाथ ॥३॥
अर्थ--प्रथम प्रेम को दोनों ने मन से ही जान लिया। (दोनों ने) आंख ही
आंख से सब बाते कर ली और गुप्त प्रेम को प्रकट किया। (कृष्ण कहते हैं) कभी
हमारे ब्रज गांव के नन्द के घर खेलने आओ। द्वार पर आकर मुझे बुला लेना, कृष्ण
मेरा नाम है। जो कहो कि तुम्हारा घर दूर है, तुम्हारे (जोर से) पुकारने पर सुनाई
देगा। तुम्हे वृषभानु बाबा की सौगन्ध है, सुबह या शाम एक बार (अवश्य) आना।
तुम्हे बिलकुल सीधी-सरल देख कर मैं तुम्हारा साथ करना चाहता हूँ। सूरदास कहते
हैं कि श्याम कृष्ण नागर (सभ्य तथा चतुर पुरुष) तथा राधा नागरि (सभ्य तथा
चतुर नारी) है, दोनो मिल कर लीला करते है ॥३॥
गई वृषभानु-सुता अपने घर।
सग सखी सौँ कहति चली यह, को जैहैँ इनकैँ दर।
बड़ी बेर भई जमुना आए, खीझति ह्वैहै मैया।
वचन कहति मुख, हृदय-प्रेम-दुख, मन हरि लियौ कन्हैया।
माता कहति कहाँ री प्यारी, कहाँ अबेर लगाई।
सूरदास तब कहति राधिका, खरिक देखि हौँ आई ॥४॥
अर्थ-वृषभानु की पुत्री (राधा) अपने घर गयी। साथ की सखियों से यह
कहती हुई चली कि कौन इनके (कृष्ण) घर जायेगा। यमुना आए हुए बहुत देर हो
गयी। माता खीझती होंगी। मुंह से यह वचन कहती है, (किन्तु) हृदय मे प्रेम की
पीड़ा है, (क्योंकि) कृष्ण ने उसका मन हर लिया। माता कहती हैं-प्यारी तुम अब
तक कहाँ थी, कहाँ देर लगायी। सूरदास कहते है कि तब राधा ने अपनी मां को
उत्तर दिया-कि मैं पशुओं का वाड़ा देखकर आई हूँ ॥४॥
नंद गए खरिकहिँ हरि लीन्हे।
देखी तहाँ राधिका ठाढ़ी, बोलि लिए तिहिँ चीन्हे।