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सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

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पृष्ठ 106

१०६ * श्रीरामचरितमानस *
[दूतने कहा—] हे नाथ! आपने जैसे कृपा करके पूछा है,
वैसे ही क्रोध छोड़कर मेरा कहना मानिये (मेरी बातपर विश्वास
कीजिये)। जब आपका छोटा भाई श्रीरामजीसे जाकर मिला, तब
उसके पहुँचते ही श्रीरामजीने उसको राजतिलक कर दिया॥ १॥
रावन दूत हमहि सुनि काना।
कपिन्ह बाँधि दीन्हे दुख नाना॥
श्रवन नासिका काटैं लागे।
राम सपथ दीन्हें हम त्यागे॥ २॥
हम रावणके दूत हैं, यह कानोंसे सुनकर वानरोंने हमें
बाँधकर बहुत कष्ट दिये, यहाँतक कि वे हमारे कान-नाक काटने
लगे। श्रीरामजीकी शपथ दिलानेपर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा॥ २॥
पूँछिहु नाथ राम कटकाई।
बदन कोटि सत बरनि न जाई॥
नाना बरन भालु कपि धारी।
बिकटानन बिसाल भयकारी॥ ३॥
हे नाथ! आपने श्रीरामजीकी सेना पूछी; सो वह तो सौ
करोड़ मुखोंसे भी वर्णन नहीं की जा सकती। अनेकों रंगोंके
भालु और वानरोंकी सेना है, जो भयंकर मुखवाले, विशाल
शरीरवाले और भयानक हैं॥ ३॥
जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा।
सकल कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा॥
अमित नाम भट कठिन कराला।
अमित नाग बल बिपुल बिसाला॥ ४॥
जिसने नगरको जलाया और आपके पुत्र अक्षयकुमारको