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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 79

७० ] ॥ सुन्दर विलास ॥
जा दिन गर्भ सयोग भयौ जब,
ता दिन वून्द छिपाहुति ताँही ।
द्वादस मास अधो मुख झूलत,
वूडि रह्यौ पुनि वा रस माहि ॥
ता रज बीरज की यह देह सु,
तू अब चालत देखत छाही ।
सुन्दर गर्व गुमान कहा शठ,
आपुनि आदि बिचारत नाही ॥५॥
॥ इति देह मलिनता गर्व प्रहार को अङ्ग सम्पूर्ण ॥
(५) बीरज-वीर्य।